उत्तराखंड समाचार 15 अप्रैल 2021

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शान के साथ संतों ने किया शाही स्नान, सभी 13 अखाड़ों ने लिया भाग; अब 27 अप्रैल को चैत्र पूर्णिमा पर होगा अंतिम शाही स्नान

मेष सक्रांति पर अमृत योग में सभी 13 अखाड़ों ने हरकी पैड़ी पर शाही शान के साथ गंगा स्नान किया। यह कुंभ का दूसरा शाही स्नान था। ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष के साथ सुबह नौ बजे शुरू हुए स्नान का क्रम शाम 6.10 बजे तक चला। शाही स्नान शुरू होने से पूर्व सुबह सात बजे तक हरकी पैड़ी स्थित ब्रह्मकुंड पर आम श्रद्धालुओं को भी डुबकी लगाने का सौभाग्य मिला। शाही स्नान के दौरान श्रद्धालु अन्य घाटों पर स्नान करते रहे।

इस बार स्नान पर वैसी सख्ती नहीं दिखी, जैसे पहले शाही स्नान के दिन देखने को मिली थी। हालांकि, कोरोना की दूसरी लहर का असर स्नान पर नजर आया और संतों और श्रद्धालुओं की संख्या अपेक्षाकृत कम रही। मेला अधिष्ठान के अनुसार शाम छह बजे तक 13.58 लाख से श्रद्धालु पुण्य की डुबकी लगा चुके थे, जबकि पहले शाही स्नान पर यह आंकड़ा 37 लाख था। अब कुंभ का अंतिम शाही स्नान 27 अप्रैल को चैत्र पूर्णिमा पर होगा।शास्त्रों के अनुसार मेष सक्रांति पर अमृत योग में होने वाला यह शाही स्नान कुंभ का मुख्य स्नान भी है। इसीलिए श्रद्धालु  ब्रह्मकुंड में स्नान के लिए उत्साहित थे। आधी रात के बाद से ही बड़ी संख्या में लोग हरकी पैड़ी स्थित ब्रह्मकुंड पहुंचने लगे थे। पुलिस ने सुबह सात बजे के बाद हरकी पैड़ी क्षेत्र को खाली कराया।इस बार भी अखाड़ों के स्नान का क्रम वही रहा जो पहले शाही स्नान में था। निर्धारित क्रम के अनुसार सुबह ठीक नौ बजे श्रीपंचायती अखाड़ा श्रीनिरंजनी और श्रीपंचायती आनंद अखाड़े का शाही जुलूस हरकी पैड़ी पहुंचा। श्रीपंचायती अखाड़ा श्रीनिरंजनी के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि और आनंद अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी बालकानंद गिरि के साथ ही मंसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत रङ्क्षवद्र पुरी के नेतृत्व में संतों ने गंगा स्नान किया। इसके बाद आचार्य महामंडलेश्वर अवेधानंद गिरि के नेतृत्व में श्रीपंदशनाम जूना अखाड़ा के संतों ने स्नान किया।  जूना अखाड़ा के छत्र तले आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी रामकृष्णानंद सरस्वती के साथ अग्नि, आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी शिवेंद्र पुरी के साथ आह्वान अखाड़े के संतों ने भी पुण्य की डुबकी लगाई। जूना अखाड़े के छत्र तले ही किन्नर अखाड़े के संतों ने भी स्नान किया। अगले क्रम में महानिर्वाणी अखाड़े ने आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी विशोकानंद गिरि,  अटल अखाड़े ने अपने आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी विश्वात्मानंद महाराज की अगुआई में गंगा में डुबकी लगाई। अब तीनों बैरागी अणियों का क्रम था। इसमें निर्वाणी अणि के अध्यक्ष श्रीमहंत राजेंद्र दास, निर्मोही अणि के श्रीमहंत धर्मदास और दिगंबर अणि के श्रीमहंत कृष्णदास की अगुआई में संतों ने 1200 खालसों के साथ ब्रह्मकुंड में स्नान किया। श्रीपंचायती बड़ा अखाड़ा उदासीन और श्रीपंचयाती नया अखाड़ा उदासीन ने अपने-अपने क्रम में श्रीमहंत महेश्वरदास और मुखिया महंत भगतराम के साथ शाही स्नान किया। आखिर में निर्मल अखाड़े ने श्रीमहंत ज्ञानदेव ङ्क्षसह वेदांताचार्य की अगुआई में शाही स्नान किया। पुलिस महानिरीक्षक (मेला) संजय गुंज्याल ने बताया कि  शाही स्नान के दौरान अखाड़ों के लिए आधा-आधा घंटे का समय निर्धारित था। पहले स्नान की भांति इस बार भी सरकार की ओर से शाही जुलूसों पर हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा की गई।

 

कुंभ योग में छलका आस्था का अमृत, कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के चलते श्रद्धालुओं की आमद घटी

नई उमंग, नई तरंग, नया उल्लास। सूर्य व चंद्र मेष राशि और गुरु कुंभ राशि में संचरण कर रहे हैं। प्रकृति एक नए बदलाव की ओर अग्रसर हो चुकी है। मौसम में भी इस बदलाव का असर साफ महसूस किया जा सकता है। यह ठीक वैसा ही योग है, जैसा समुद्र मंथन से निकले अमृत कलश को पाने के लिए देव-दानव संघर्ष के दौरान बना होगा। ऐसे अमृत योग में कौन भला मां गंगा का सानिध्य नहीं पाना चाहेगा। हर श्रद्धालु के चेहरे पर इस भाव को सहजता से पढ़ा जा सकता है।

हालांकि, कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के चलते श्रद्धालुओं की आमद घटी है और अखाड़ों ने भी अपना लाव-लश्कर सीमित कर दिया है, लेकिन आस्था में कहीं कोई कमी नजर नहीं आती। दसों दिशाओं में संगीत लहरियों के बीच गंगा मैया और अखाड़ों के ईष्ट देवों की जै-जैकार गूंज रही है। अभी सुबह के पौने नौ बजे हैं। मेला प्रशासन की ओर से हरकी पैड़ी समेत आसपास के घाटों से श्रद्धालुओं को हटाया जा रहा है। अब यहां शाही स्नान के लिए अखाड़ों को पहुंचना है। स्नान क्रम के अनुसार इस बार भी निरंजनी अखाड़े को ही पहले स्नान करना है। उसके साथ आनंद अखाड़ा भी रहेगा। पंद्रह मिनट गुजरे होंगे कि दोनों अखाड़ों का लाव-लश्कर अवधूती आभा बिखेरता हुआ हरकी पौड़ी आ पहुंचा। यही कुंभ का सबसे बड़ा आकर्षण है। इस दौरान गंगा में डुबकी लगाने से ज्यादा अवधूतों को डुबकी लगाते देखना अपने आप में अविस्मरणीय अनूभूति है। तकरीबन आधे घंटे बाद इन अखाड़ों ने हरकी पैड़ी से वापसी की और थोड़ी ही देर में हरकी ब्रह्मकुंड से लेकर महिला स्नान घाट तक गंगा का तट श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़ा के साथ ही अग्नि व आह्वान अखाड़ों के साधु-संन्यासी और अवधूतों से पट गया। इस सबके बीच किन्नर अखाड़े के भी अपने अलग ही रंग हैं। अब बारी थी महानिर्वाणी व अटल अखाड़े की और उन्होंने भी ज्यादा देर प्रतीक्षा नहीं कराई। अवधूती उल्लास बिखेरने के बाद जैसे ही ये अखाड़े हरकी पैड़ी से विदा हुए इंतजार होने लगा तीनों बैरागी (वैष्णव) अणियों के पहुंचने का। इन तीनों अणियों में 18 अखाड़े और 1200 खालसे शामिल हैं, इसलिए इनका लाव-लश्कर भी सबसे बड़ा होता है। धीरे-धीरे अपने ईष्ट और प्रतीकों के साथ बैरागी संत हरकी पैड़ी पहुंचने लगे हैं और तकरीबन 20 मिनट बाद पूरा गंगा तट वैराग्य के भाव में डूबा प्रतीत होने लगा। हालांकि, इस स्नान पर बैरागी संत-महंतों की संख्या उतनी नहीं थी, जितनी कि सोमवती अमावस्या पर देखने को मिली। बैरागियों के अपने अखाड़ों की ओर प्रस्थान के बाद उदासीन अखाड़ों के दीदार को हमें लंबा इंतजार करना पड़ा।  एक-सवा घंटे हरकी पैड़ी पर वीरानी पसरी रही, तब जाकर उदासीन संतों के कदम यहां पड़े। पहले आमद हुई श्री पंचायत अखाड़ा बड़ा उदासीन की, जिसके स्नान का भी अलग ही अंदाज है। तकरीबन आधा घंटे अपने ईष्ट देव की पूजा-अर्चना के बाद उदासीन संतों ने गंगाजल का पावन स्पर्श किया। उनके हरकी पैड़ी से विदा होने के बाद शाही अंदाज में श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन का प्रवेश हुआ। आखिर में स्नान को पहुंचा निर्मल अखाड़ा और इसी के साथ कुंभ का दूसरा शाही स्नान संपन्न हुआ। उधर, हरकी पैड़ी में प्रवेश प्रतिबंधित होने के कारण कुंभनगरी के अन्य घाटों पर दिनभर आस्था की डुबकियां लगती रहीं। कोरोना के चलते अपेक्षा से काफी कम श्रद्धालुओं के स्नान को पहुंचने के कारण शहर में किसी तरह की सख्ती भी नजर नहीं आई। लोग सभी रास्तों से आवाजाही करते रहे। हां! इतना जरूर हुआ कि शाम को गंगा आरती के बाद हरकी पैड़ी एक बार फिर श्रद्धालुओं से गुलजार हो उठी। इससे पहले सुबह भी पौने नौ बजे तक यहां आम श्रद्धालुओं को स्नान की छूट रही। इसी कारण मध्यरात्रि से लेकर भोर की बेला तक मेष संक्रांति स्नान को सर्वाधिक श्रद्धालु उमड़े। कुंभ का मुख्य स्नान शांतिपूर्ण और उल्लास के साथ संपन्न होने पर सभी ने राहत की सांस ली।

 

सल्ट उपचुनाव को भाजपा ने झोंकी पूरी ताकत, प्रचार के अंतिम दिन आज सीएम समेत जुटेंगे दिग्गज

उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में विधानसभा की सल्ट सीट के उपचुनाव के लिए भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी है। चुनाव प्रचार के अंतिम दिन गुरुवार को मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के अलावा केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री और उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम, प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक, पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा समेत अन्य नेता सल्ट में जुटेंगे। वे वहां भाजपा प्रत्याशी महेश जीना के समर्थन में आयोजित चुनावी रैली को संबोधित करेंगे।सल्ट सीट का उपचुनाव भाजपा के लिए साख का सवाल है।

प्रदेश की भाजपा सरकार और पार्टी संगठन में हुए नेतृत्व परिवर्तन के बाद हो रहे इस उपचुनाव में मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत और प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक के सियासी कौशल की परीक्षा होनी है। यदि पार्टी को जीत हासिल हुई तो यह 2022 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के मद़्देनजर मनोबल उसका बढ़ाने वाली भी होगी। इसे देखते हुए भाजपा ने सल्ट में पूरी ताकत झोंकी हुई है।

ख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत को भी उपचुनाव में प्रचार के लिए क्षेत्र में जाना था, मगर कोरोना संक्रमण की चपेट में आने के कारण वह सल्ट नहीं जा पाए थे। अब कोरोना को मात देने के बाद चुनाव प्रचार के अंतिम दिन उनका सल्ट का कार्यक्रम निर्धारित किया गया है।

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत गुरुवार को देहरादून से भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री और प्रदेश प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम, केंद्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मदन कौशिक व पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के साथ सल्ट के लिए उड़ान भरेंगे। दोपहर साढ़े 12 बजे सभी नेता वहां चुनावी रैली को संबोधित करेंगे।

रुद्रुपर में एनआरआई के घर से लाइसेंसी रिवाल्वर उड़ा ले गए चोर

रुद्रपुर में एनआरआई के घर को निशाना बना कर चोर घर से लाइसेंसी रिवाल्वर उड़ा ले गए। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। बगवाड़ा रुद्रपुर निवासी गुरमेल सिंह पुत्र मान सिंह ने पुलिस को दी तहरीर में कहा उसके मामा रगुविन्दर सिंह पुत्र भगवान सिंह का घर बगवाड़ा मे है वह पिछले काफी समय से कनाडा में रह रहे हैं। ऐसे में उनका यहां का घर बंद र‍हता है। आठ से 10 दिन के अंतराल वर घर की सफाई कराते हैं।

नौ अप्रैल को जब वह मामा के घर गया तो उनके घर की खिड़की खुली थी और ग्रिल टूटी हुई है। जब वह घर के अंदर घुसा तो कमरे के गेट का कुंडा टूटा हुआ था। कमरे से मामा की लाइसेंसी रिवाल्वर गायब थी। चोर लाइसेंसी रिवाल्वर के साथ वहां रखी विदेशी शराब व कंबल सहित अन्य सामान चोरी कर ले गए। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आस पास के सीसीटीवी खंगालने के साथ ही संदिग्धों की धर पकड़ शुरू कर दी है।

शिक्षा विभाग को जल्द मिलेंगे नौ अपर निदेशक, रिक्त पदों पर डीपीसी जारी:uttarakhand

उत्तराखंड में शिक्षा विभाग में नौ संयुक्त शिक्षा निदेशक जल्द अपर निदेशक बनेंगे। अपर निदेशक के रिक्त पदों पर डीपीसी हो चुकी है। जल्द ही इनपर पदोन्नति के आदेश जारी किए जाएंगे। इसके बाद संयुक्त शिक्षा निदेशक के रिक्त पदों पर डीपीसी होगी। प्रदेश में शिक्षा विभाग में निदेशक का एक, अपर निदेशक के नौ और संयुक्त निदेशक के 11 पद रिक्त हैं।

उप निदेशकों के 12 और खंड शिक्षाधिकारियों के 50 से ज्यादा पद खाली हैं। रिक्त पदों पर निचले क्रम के अधिकारियों को प्रभार सौंपकर काम चलाया जा रहा है। अपर निदेशक के रिक्त पदों पर डीपीसी हो चुकी है। नौ पदों पर डीपीसी की दौड़ में 23 अधिकारी रहे हैं। अपर निदेशक पद की डीपीसी में चयन का आधार ज्येष्ठता के स्थान पर श्रेष्ठता है। दरअसल, शिक्षाधिकारी पदोन्नति के लिए लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं। वार्षिक चरित्र पंजिकाओं में प्रविष्टि दर्ज न होने की वजह से सालभर से ज्यादा समय तक पदोन्नति बाधित रही। पदोन्नति के लिए चरित्र पंजिकाओं में वर्ष 2019-20 की प्रविष्टियां दर्ज की गईं।

शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय के शिक्षाधिकारियों की डीपीसी जल्द करने के निर्देश रंग लाए हैं। अपर निदेशक पदों पर डीपीसी के बाद अब संयुक्त शिक्षा निदेशक के रिक्त पदों के लिए डीपीसी की कसरत तेज कर दी गई है। अपर निदेशक पदों पर पदोन्नति आदेश जारी होने के बाद संयुक्त निदेशक पदों के लिए डीपीसी होगी।

आरएसएस उत्तराखंड ने प्रांत में प्रत्यक्ष शाखाओं को किया स्थगित, इस वजह से लिया गया फैसला

कोरोना वायरस संक्रमण मामलों को देखते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ उत्तराखंड ने प्रांत में प्रत्यक्ष शाखाओं को अगली सूचना तक स्थगित कर दिया है। संघ के प्रांत प्रचारक युद्धवीर सिंह अध्यक्षता में संघ की आज हुई बैठक में यह फैसला लिया गया गया है।

कोरोना संक्रमित होने पर फेफड़े की कोशिकाओं के ‘मेटोबोलिक रिएक्शन रेट’ में होता है बदलाव

कोरोना महामारी की दूसरी लहर बेहद खतरनाक होती जा रही है। इसमें संक्रमण के मामले तो बढ़ ही रहे हैं, साथ ही मौतों का ग्राफ भी तेजी से ऊपर उठ रहा है। इंडियन इंस्टीच्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आइआइटी) खड़गपुर ने ऐसा मॉडल विकसित किया है, जिससे पता चला है कि कोरोना संक्रमित होने के बाद फेफड़े की कोशिकाओं के ‘मेटोबोलिक रिएक्शन रेट’ में बदलाव होता है। इस अनुसंधान की बदौलत कोरोना महामारी को और भी अच्छी तरह से समझा जा सकेगा और इससे निपटने के लिए इलाज के बेहतर तरीके विकसित किए जा सकेंगे।

आइआइटी खड़गपुर के स्कूल ऑफ एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग  के सहायक प्रोफेसर डॉ. अमित घोष ने कहा-‘हमने इस जीनोम-स्केल मेटोबोलिक मॉडल को विकसित करने में कोरोना से संक्रमित मनुष्य की सामान्य ब्रोंकियल सेल के जीन एक्सप्रेशन का इस्तेमाल किया। इसके साथ वायरस के माइक्रो मोलेकुलर मेक अप का भी प्रयोग किया गया है।’ अन्य अनुसंधानकर्ता पीयूष नंदा ने कहा-‘इस मॉडल के जरिए हमने बताने की कोशिश की है कि मेटोबोलिज्म किस तरह से काम करता है और बीमार पड़ने पर इसमें किस तरह से बदलाव आते हैं।

अनुसंधान में यह भी पता चला है कि जब कोरोना जैसे वायरस शारीरिक कोशिकाओं पर हमला करते हैं तो किस तरह से सैकड़ों केमिकल रिएक्शन संबंधी बदलाव आते हैं। इससे इस बीमारी के बारे में हमारी समझ और बेहतर होगी। मेटोबोलिक रिप्रोग्रामिंग के बारे में हमारी समझ जितनी अच्छी होगी, हम कोरोना से निपटने को इलाज के उतने ही बेहतर तरीके तलाश पाएंगे।’

अनुसंधानकर्ताओं का अनुमान है कि कोरोना से लिपिड मेटोबोलिजम, विशेषकर फैटी एसिड ऑक्सीडेशन, कॉलेस्ट्राल बायोसिंथेसिस सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं।

जानकारी हो कि कोरोना महामारी की दूसरी लहर बेहद खतरनाक होती जा रही है। इसमें संक्रमण के मामले तो बढ़ ही रहे हैं, साथ ही मौतों का ग्राफ भी तेजी से ऊपर उठ रहा है। देश में कोरोना वायरस संक्रमण के एक दिन में अब तक के सर्वाधिक दो लाख नए मामले सामने आए हैं। ये मामले 10 दिन में लगभग दोगुना हो गए है। अमेरिका में एक लाख से दो लाख मामले पहुंचने में 21 दिन लगे थे। महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक और केरल समेत 16 राज्यों में संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। इनमें से भी अकेले महाराष्ट्र में ही सबसे अधिक एक्टिव केस हैं।

देश में कुल संक्रमितों का आंकड़ा एक करोड़ 40 लाख 74 हजार को पार कर गया है। इनमें से एक करोड़ 24 लाख 29 हजार से ज्यादा मरीज पूरी तरह से ठीक हो चुके हैं। मरीजों के उबरने की दर 88.92 फीसद पर आ गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से आज बृहस्पतिवार को सुबह आठ बजे जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक पिछले 24 घंटे में 2 लाख से अधिक नए मामले सामने आए हैं। इस दौरान 1,038 लोगों की मौत हुई है और मृतकों की संख्या 1,73,123 हो गई है।

 

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