Poem

पीर ये पहाड़ सी (कविता)

बरस फिर गुज़र गया तिमिर खड़ा रह गया उजास की आस थी निराश क्यों कर गया शहर शहर पसर गया साँस साँस खा गया कोविड का साल ये जहर जहर दे...

आखिर क्यों ??? किसानों पर रचित कविता : निर्मला जोशी

बहुत भारी पड़ेगा तुम्हे किसानों के दिल से खेलना आये दिन उनके नाम पर सियासत करना ये न भूलना कभी भी कि तुम्हारी थाली में जो रोटी है वो मेरे अन्नदाता...

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