यादों के पृष्ठ

रात, पंक्चर साइकल में वजन और 15 किलोमीटर दूर थी मंजिल

साल 1996 मैं 12th का एग्जाम देकर एक डोर टू डोर मार्केटिंग कंपनी में सेल्समैन था। दरअसल रिजल्ट आने लगभग 2 महीने का समय था।...

एक्जाम की कॉपियाँ

आज अचानक से नजर पड़ी एक गट्ठर पर, सफ़ेद-कापियां पैरेलल रूल वाली- जिनमें लिखा होता है ‘उत्तर-पुस्तिका’। भाईसाब अपने हाई-स्कूल और इंटर के दिन...

कोहरा, झिलमिल सी बूंदे, ठंडी हवा और नैनीताल का वो सफर

बात है कुछ साल पहले की, मेरे पापा हमारे गांव से शहर हमसे और हमारे भाई बहनों से मिलने आए थे। पापा बोले कि...

पोखरा में मिले एक ड्राइवर ने कैसा व्यवहार किया!

साल 2007 मुझे 1 सप्ताह के लिए नेपाल जाना था, एक मार्केट सर्वे के लिए। अगस्त का महीना था, उत्तर बिहार बाढ़ में डूबा हुआ...

ऐसा रोचक होता था बचपन डिजिटल दुनिया से पहले।

हम सभी का मन करता है कि एक बार फिर लौट चलें बचपन में। खासतौर पर तब, जब हम उम्र के उस पड़ाव में...

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