यादों के पृष्ठ

अतिथि देवो भव (समृद्ध ग्रामीण पारंपरिक आतिथ्य सत्कार का अनुभव)

आज मैं जब  इस विषय पर  चर्चा करने जा रहा हूँ तो मेंरे अंतर्मन में  अनेक विचारों का आवागमन चल रहा है।कभी सोच रहा...

काफल का पेड़

काफल का पेड़, जो मेरे घर के पीछे स्थित था।मैं तब छोटा था, अल्मोड़ा में, पनियाँउडार मुहल्ले में रहता था। वहीं था ये काफल...

माँ गंगा ने बुलाया है – हरिद्वार यात्रा अनुभव

मैैं यहाँ स्वयं  नही आया, बल्कि माँ गंंगा  ने मुझे बुुलाया था अपने सानिध्य में, अपने शुभ-आशीष  और स्नेह के साथ। माँ  पुत्र को...

पर क्या पता है तुम्हे, मुझे पता है (कविता)

हां मैं नहीं कर सकता गौर, तुम्हारी कानों की नई इयररिंग्स को। हां मै नही कह सकता हर बार, तुम्हारे दुपट्टे और नेल पोलिश का कलर, हर...

घर जो छोड़ना पड़ा

चम्पानौला का तिमंजिला मकान, मेरी दिल्ली वाली बुआ के ससुराल वालों का था, और हम लोग उस मकान के पाँच कमरों मे साठ रुपये...

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