वो बचपन की यादें और शरारतें
बात है उस समय की जब मैं प्राइमरी स्कूल में पढ़ती थी जो कि सिर्फ प्री नर्सरी से फिफ्थ क्लास तक था और मेरे...
बारिश की वो रात…
वर्ष 199612th का एग्जाम देकर कोई काम धंधा ढूंढ रहा था, तभी अखबार में वैकेंसी दिखी - डोर टू डोर मार्केटिंग के लिए। मैं...
पहाड़ों की सुबह
पहाड़ के गाँव में सुबह जल्दी हो जाने वाली हुयी।सुबह 5 बजे से बरसात शुरू हो गयी थी, लेकिन आज के सुबह के काम...
अफ्रीकन महिला – अपनत्व बिना शब्दों के!
साल 2008
मैं पहली बार अफ्रीका गया था, और 3 महीने के लिए दार ए सलाम, तंजानिया में था। यह हिंद महासागर के किनारे बसा...
घर जो छोड़ना पड़ा
चम्पानौला का तिमंजिला मकान, मेरी दिल्ली वाली बुआ के ससुराल वालों का था, और हम लोग उस मकान के पाँच कमरों मे साठ रुपये...
बस में वो अकेली लड़की (कविता)
बस की किनारे वाली सीट की खिड़की से, बाहर झांकती वो लड़की।पीछे छुटते पहाड़ों, नदी और नदी के पार, उंचाई पर पर बसे...
दांत का दर्द और डॉक्टर
जनाब जिंदगी मे हमारे अफ़साने बनना तो तय था लेकिन कभी सोचा नही था के हमारे दांतों के भी इतने अफ़साने बन जायेगे कि...
सपनों की साइकिल से हकीकत का सफर
यह बात है उन दिनों की जब मैं छठी कक्षा में पढ़ती थी।सपनों की साइकिल से हकीकत का सफरजब मैं साइकिल...
अंधेरी रात के चमकीले भूत का सच
दोस्तों मैं आज आपको कहानी बताने जा रही हूं, अंधेरी रात के चमकीले भूत की। इस कहानी में पांच-छह साल के बच्चों का ग्रुप...
कुसुम दी- कितने ही युवाओं के भविष्य को स॔वारने में उन्होंने योगदान दिया
सुबह का समय था, मैं बैठक में बैठकर अखबार पढ़ रहा था और चाय की चुस्की का आनंद ले रहा था। अचानक फोन (लैंडलाइन)...
कहाँ गया वो अल्मोड़ा!
आज लगभग बयालीस वर्षों के बाद अपनी जन्मभूमि अल्मोड़ा की पावन भूमि की मिट्टी को अपने माथे पर लगाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। मन...
जंगली सुअरों से खेती को ऐसे बचाया
उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के गरुड़ विकासखंड के अणां गांव के काश्तकारों ने खेतों में लगी फसलों को जंगली सुअरों से बचाने के लिए...
काफल का पेड़
काफल का पेड़, जो मेरे घर के पीछे स्थित था।मैं तब छोटा था, अल्मोड़ा में, पनियाँउडार मुहल्ले में रहता था। वहीं था ये काफल...
एक्जाम की कॉपियाँ
आज अचानक से नजर पड़ी एक गट्ठर पर, सफ़ेद-कापियां पैरेलल रूल वाली- जिनमें लिखा होता है ‘उत्तर-पुस्तिका’। भाईसाब अपने हाई-स्कूल और इंटर के दिन...
अल्मोड़ा दो दशक पहले!
तब लोग मिलन चौक में लाला बाजार से थाना बाजार तक तो लगभग रोज ही घूम आते। अब भी शायद जाते हों। यह हैं अल्मोड़ा का मशहूर मिलन चौक, नाम के अनुरूप...
आँगन बचपन वाले अब कहाँ!
बचपन! क्या दिन हुआ करते थे वो भी। सुबह-सुबह बिस्तर से उठकर घर की देहरी में बैठकर, मिचमिचाई आँखों को मलते हुऐ, मैं, आँगन...
अफ्रीका में, जो मैंने सीखा
साल 2008
मैं अपने जीवन में पहली बार अफ्रीका जा रहा था। उसके पहले सिर्फ नाम सुना था, अफ्रीका द ब्लैक कॉन्टिनेंट। मैं बड़ा खुश...
अपनी बोली बात निभाएँ, रिश्ते स्वयं ही बन जाएंगे…
साल 2007
मैं 4 दिन के लिए नेपाल की राजधानी काठमांडू में था। मैं काठमांडू मार्केट का सर्वे करना चाहता था। काठमांडू हिमालय की तराई...
अल्मोड़ा लाला बाजार की यादें
अब धीरे धीरे हल्द्वानी की सार पड़ती जा रही है।बात बात मे अब शिमला मे ऐसा, शिमला मे वैसा कम निकलता है, शिमला मे...
ऐसा रोचक होता था बचपन डिजिटल दुनिया से पहले।
हम सभी का मन करता है कि एक बार फिर लौट चलें बचपन में। खासतौर पर तब, जब हम उम्र के उस पड़ाव में...





















