बारिश में ये मौसम और आँखों में नमी नैनीताल के पुराने दिनों की
आज सुबह से बरसात ने मौसम सुहावना कर दिया है। बरामदे मे कुर्सी डाल गरम चाय की प्याली के साथ अतीत की गहराईयो मे...
बचपन वाली गर्मियों की छुट्टियां
बचपन की यादों मे नैनीताल के साउथ वूड कोटेज की हल्की हल्की यादे अब तक साथ निभा रही हैं। बाबुजी अल्मोडा मे कार्यरत थे,...
ईमानदारी में जब विनम्रता जोड़ी जाती है तो, परिणाम आता है सम्मान
साल 2002
एक टेक्सटाइल कंपनी में, मैंने एग्जीक्यूटिव ट्रेनी के तौर पर ज्वाइन किया था। प्रशिक्षण के सिलसिले में दो सप्ताह के लिए लुधियाना सेल्स ऑफिस...
विदेशी धरती, अपहरणकर्ताओं के चंगुल में…
साल 2010
मैं 1 सप्ताह के लिए दार ए सलाम, तंजानिया गया हुआ था। मेरे डिस्ट्रीब्यूटर का ऑफिस इंडिया स्ट्रीट में था, लगभग 2:00 बजे...
ना कह पाने की व्यथा की कथा
यात्रा ए लेह
जब भी किसी मित्र को यात्रा वृतांत अथवा किस्से कहानियां सुनाते पाते है तो बड़ा रश्क होता है कि देखो, कितना भाग्यशाली...
जंगली सुअरों से खेती को ऐसे बचाया
उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के गरुड़ विकासखंड के अणां गांव के काश्तकारों ने खेतों में लगी फसलों को जंगली सुअरों से बचाने के लिए...
सम्मान ऐसी कीमती वस्तु जिसे देने में आपकी जेब से कुछ नहीं जाता
साल 2005
मैं हिंदुस्तान की आर्किटेक्चरल हार्डवेयर की सबसे बड़ी कंपनी में झारखंड और बिहार का सेल्स देखता था। पूरा झारखंड और बिहार घूमता रहता...
गैर पेशेवर रिटेलर से मिला एक कड़वा अनुभव
साल 2017
मैं अपनी कंपनी का बिजनेस बढ़ाने का कोशिश कर रहा था। हमारे पास प्रोडक्टस बहुत कम थे, हमने दो और कंपनियों का डिस्ट्रीब्यूशन...
अंधेरी रात के चमकीले भूत का सच
दोस्तों मैं आज आपको कहानी बताने जा रही हूं, अंधेरी रात के चमकीले भूत की। इस कहानी में पांच-छह साल के बच्चों का ग्रुप...
लिट्टी चोखा, समान मंगाया, घर में बनाया, पसंद भी आया पर फिर कभी दोबारा...
जनाब, सात आठ माह से पुत्र से न मिल पाने की विवशता, श्रीमतीजी का पुत्र मोह, पुत्र के रहन सहन, खाने पीने की व्यवस्था...
एक्जाम की कॉपियाँ
आज अचानक से नजर पड़ी एक गट्ठर पर, सफ़ेद-कापियां पैरेलल रूल वाली- जिनमें लिखा होता है ‘उत्तर-पुस्तिका’। भाईसाब अपने हाई-स्कूल और इंटर के दिन...
कहाँ गया वो अल्मोड़ा!
आज लगभग बयालीस वर्षों के बाद अपनी जन्मभूमि अल्मोड़ा की पावन भूमि की मिट्टी को अपने माथे पर लगाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। मन...
अल्मोड़ा लाला बाजार की यादें
अब धीरे धीरे हल्द्वानी की सार पड़ती जा रही है।बात बात मे अब शिमला मे ऐसा, शिमला मे वैसा कम निकलता है, शिमला मे...
पर क्या पता है तुम्हे, मुझे पता है (कविता)
हां मैं नहीं कर सकता गौर,
तुम्हारी कानों की नई इयररिंग्स को।हां मै नही कह सकता हर बार,
तुम्हारे दुपट्टे और नेल पोलिश का कलर, हर...
जब की -अँधेरे में सुनसान सड़क से गुजरती लड़की की मदद की कोशिश
बात कुछ 20 वर्ष पुरानी है, अपने कॉलेज के दिनों में, एक शाम मित्र और मैं ब्राइट एंड कार्नर वापस लौट रहे थे, रात...
घर जो छोड़ना पड़ा
चम्पानौला का तिमंजिला मकान, मेरी दिल्ली वाली बुआ के ससुराल वालों का था, और हम लोग उस मकान के पाँच कमरों मे साठ रुपये...
अफ्रीकन महिला – अपनत्व बिना शब्दों के!
साल 2008
मैं पहली बार अफ्रीका गया था, और 3 महीने के लिए दार ए सलाम, तंजानिया में था। यह हिंद महासागर के किनारे बसा...
पोखरा में मिले एक ड्राइवर ने कैसा व्यवहार किया!
साल 2007
मुझे 1 सप्ताह के लिए नेपाल जाना था, एक मार्केट सर्वे के लिए। अगस्त का महीना था, उत्तर बिहार बाढ़ में डूबा हुआ...
काफल का पेड़
काफल का पेड़, जो मेरे घर के पीछे स्थित था।मैं तब छोटा था, अल्मोड़ा में, पनियाँउडार मुहल्ले में रहता था। वहीं था ये काफल...
माँ गंगा ने बुलाया है – हरिद्वार यात्रा अनुभव
मैैं यहाँ स्वयं नही आया, बल्कि माँ गंंगा ने मुझे बुुलाया था अपने सानिध्य में, अपने शुभ-आशीष और स्नेह के साथ। माँ पुत्र को...





















