पोखरा में मिले एक ड्राइवर ने कैसा व्यवहार किया!

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साल 2007
मुझे 1 सप्ताह के लिए नेपाल जाना था, एक मार्केट सर्वे के लिए। अगस्त का महीना था, उत्तर बिहार बाढ़ में डूबा हुआ था। हम रक्सौल होकर नहीं जा सकते थे। मैं अपने एक कलीग के साथ गोरखपुर पहुंचा। गोरखपुर से एक ट्रेन पकड़ कर सुनौली बॉर्डर पहुंचा। वहां से टैक्सी लेकर काठमांडू, बुटवल से काठमांडू। अगर आप रोड से ट्रैवल करते हैं तो त्रिशूली नदी के किनारे किनारे आप चलेंगे, बेहद खूबसूरत नजारे आपको देखने को मिलेंगे। एक तरफ पहाड़ की ऊंची चोटिया,  दूसरी तरफ त्रिशूली नदी। बीच-बीच में रास्ते में मिलेंगे आपको छोटे बड़े झरने, आप चाहे तो रास्ते में रोककर त्रिशूली नदी में रिवर राफ्टिंग का भी आनंद ले सकते हैं।
चार दिन काठमांडू में रुक कर, वहां से हम पोखरा पहुंचे। पोखरा एक लेक के किनारे बसा हुआ एक बेहद खूबसूरत शहर है। अगर आसमान साफ हो तो माउंट अन्नपूर्णा, माउंट धौलागिरी और माउंट फिशटेल आपको सुबह-सुबह दिखाई पड़ेगा। लेक के बीचोंबीच एक होटल है, फिश टेल लॉज, हम उसी में ठहरे थे। चारों तरफ पानी से घिरा हुआ, हरा भरा यह होटल बेहद खूबसूरत है। होटल तक जाने के लिए हमें नाव लेनी पड़ती थी। होटल वाले का दावा था कि प्रिंस चार्ल्स, राजीव गांधी, जनरल जिया उल हक, जैसे लोग भी उस होटल में ठहर चुके हैं। होटल के मैनेजर ने हमें एक किताब दिखाई – “हंड्रेड प्लेसेस टू सी बिफोर यू डाय”,  उस पुस्तक की लिस्ट में भी उस होटल को जगह दी गई थी।
पोखरा के बारे में जानने के लिए देखें ?

 

दो दिन पोखरा में रुकने के बाद, हमें वापस लौटना था। एक-दो दिन में एक टैक्सी वाले से जान पहचान हो गई थी और अक्सर हमें मार्केट छोड़ दिया करता था। उससे बात की तो उसने कहा वह हमें गोरखपुर बॉर्डर पर छोड़ देगा। दूरी लगभग 200 किलोमीटर थी। सिंगल लेन होने के कारण लगभग 5 घंटे की यात्रा थी। शनिवार सुबह सात बजे तय समय पर टैक्सी वाला आ गया, हम निकल पड़े। लगभग साठ सत्तर किलोमीटर चलने के बाद, टैक्सी मैं तेल लेने के लिए एक पेट्रोल पंप पर रोका। तेल लेकर हम निकले, लगभग 2 किलोमीटर चलने के बाद ही टैक्सी बंद हो गई।
टैक्सी वाले ने दो-तीन बार स्टार्ट करने की कोशिश की, लेकिन घूर्र घूर्र कर टैक्सी बंद हो जा रही थी। उसने बोनट खोल करके देखा, उसे भी कुछ समझ में नहीं आ रहा था। लगभग 10-15 मिनट तक उसने स्टार्ट करने की कोशिश की, लेकिन असफल रहा, हम भी टैक्सी से निकलकर इधर-उधर टहल रहे थे।
वह पास आकर बेहद शर्मिंदगी से बोला, सर लगता है कि तेल जो मैं डलवाया हूं उसमें कुछ प्रॉब्लम थी। टैक्सी बंद हो गई है। अगर आप चाहें तो कोई दूसरी गाड़ी करके आप जा सकते हैं। मैं आपसे कोई पैसे चार्ज नहीं करूंगा और नहीं तो मैं पोखरा से दूसरा टैक्सी बुलाता हूं। लगभग डेढ़ घंटा लगेगा, हमने कहा भाई दूसरी टैक्सी से बुला ले।
हम एक पेड़ के नीचे जाकर बैठ गये। टैक्सी वाला भी एक दिशा में पैदल चला गया। सिंगल लेन की रास्ता था जंगल के बीचो बीच। बीच-बीच में कभी कभार एक-दो गाड़ियां आ जा रही थी। लगभग 10 -15 मिनट तक टैक्सी वाला हमें दिखाई नहीं पड़ा, हमें लगा कहीं ऐसा ना हो कि टैक्सी वाला गायब हो जाए सिर्फ इस बात की तसल्ली थी, कि उसकी टैक्सी हमारे सामने खड़ी है। लगभग आधे घंटे के बाद टैक्सी वाला वापस लौटा, एक 2 लीटर का कोल्ड ड्रिंक्स का बोतल और चिप्स बिस्किट के कुछ पैकेट, हमारे लिए लेकर आया था।
लगभग डेढ़ घंटे में दूसरा टैक्सी आ गया। उसने दूसरे टैक्सी के ड्राइवर को वहीं रहने को कहा, हमारा सामान दूसरे टैक्सी में शिफ्ट किया, और खुद ड्राइव कर हमें बॉर्डर पर छोड़ा। रास्ते में भी उसने दो-तीन बार माफी मांगी। पहुंचने के बाद उसने फिर हमें हाथ जोड़कर माफी मांगी। हमने उसे तय किराए से ₹500 ज्यादा देने की कोशिश की। लेकिन उसने सिर्फ तय किराया लेना स्वीकार किया, उसने कहा अब वह इस टैक्सी से वापस जाएगा, और अपनी टैक्सी को इस से बांधकर वापस पोखरा लेकर जाएगा और वहां ठीक करवाएगा।

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