साइबर क्राइम तो सुना ही होगा

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आपने साइबर हमले के बारे में तो सुना ही होगा साइबर क्राइम को अपराध हैं जो पढ़े लिखे चोरों के द्वारा किया जाता है और इसे करना और भी आसान तब हो जाता है जब आपके पास स्मार्ट फ़ोन्स हों !

जी हाँ तो ये साइबर क्राइम होते कैसे है क्या आप जानते हैं अगर नहीं तो ये जानकारी आपके लिए है

साइबर क्राइम जो आज के आधुनिक युग में आम सा होता जा रहा है और सबसे आगे उत्तरप्रदेश है आंकड़ों की माने तो 2015 में साइबर क्राइम का आंकड़ा 11592 दर्ज किया गया था! जबकि वर्ष 2014 में यही आंकड़े 9622 थे, साइबर क्राइम के सबसे ज्यादा मामले पुरे देश में ऑनलाइन ठगी के 2255 सामने आये हैं!
उत्तराखंड में भी तेजी से बढ़ रहे हैं साइबर क्राइम के मामले और ज्यादा तर वो लीग इसके शिकार होते हैं जो लोग वृद्ध हैं या काम पढ़े लिखे होते हैं परन्तु तकनीकों के ज्यादातर ऑनलाइन होने के कारण कुछ पढ़े लिखे लोग भी अब इसके चंगुल में आने लगे हैं जिससे बचपाना बहुत मुश्किल होता हैं!

कैसे होता है ऑनलाइन साइबर क्राइम

इसके कई चरण है पर सबसे आसान और प्रथम चरण है इसका डाटा शेयरिंग, क्या आपने कभी सोचा है की कुछ फाइनेंस कंपनियों के पास आपका नंबर और डिटेल्स कैसे आते हैं जबकि आपने सामने से कभी उनको अपनी जानकारी नहीं दी होती, फिर आपके पास क्रेडिट कार्ड, लोन्स, कार लोन्स, हाउस लोन्स के लिए प्राइवेट कंपनियों से कैसे कॉल्स आते हैं! आपके मोबाइल नंबर उन तक पहुँचे कैसे?

अक्सर पैसों का आभाव और जरूरतें हमसे गलत काम करा ही देती हैं, कुछ ऐसा ही होता है कॉल सेंटर्स में काम करने वाले कर्मचारियों के साथ वो न चाहा कर भी इस अपराध का अनचाहा हिस्सा बन जाते हैं, कुछ लोग उनसे डाटा मांगते हैं जिसे वो प्रिंट या सॉफ्ट कॉपी के जरिये उनके साथ शेयर करते हैं जिसमे उन्हें प्रति व्यक्ति डाटा के आधार पर कुछ रुपए भी मिलते हैं ज्यादा आमदनी के लालच में वो न चाहा कर भी इसका हिस्सा बन जाते हैं!
डाटा शेयरिंग सिर्फ यहीं से नहीं बल्कि आपके स्मार्ट फ़ोन्स से भी होता है, जब भी आप कोई ऐप्प डाउनलोड करते हैं, उसे डाउनलोड करने के बाद आप बिना पढ़े अल्लोव ( allow) करते रहते हैं, ये सब आपका डाटा शेयरिंग ही है इसी से आपका डाटा दूसरे लोगो, दूसरी कंपनियों के साथ शेयर हो जाता है जब भी आप इंटरनेट पर होते हैं, तो अनचाहे वेब लिंक पर क्लिक कर देते हैं, जिससे आप उसे इनस्टॉल किये बिना भी उनकी अनचाही कुछ फाइल्स डाउनलोड कर लेते हैं और इसका आपको पता भी आपको नहीं चलता न चाहते हुए भी आपका डाटा शेयर होता है!

शायद आपने गौर किया होगा की आपका मोबाइल बिना कॉल्स और बिना किसी इस्तमाल के भी रखे – रखे बहुत ज्यादा गर्म हो जाता है, जिसके कारण आपको ऐसा लगता है की मोबाइल में शायद कुछ खराबी है पर असल में ऐसा कुछ नहीं होता, कुछ ऐसी फाइल्स जो अनजाने में इंटरनेट से डाउनलोड हो गयी है और जाने अनजाने में वो आपकी जानकारी ऑनलाइन सर्वर में भेजता है, इसी जानकारियों का फायदा कुछ हैकर उठते हैं और आपके साथ फ्रॉड करते हैं जिससे हम अनभिग्ये होते हैं!
उत्तराखंड में भी साइबर अपराध के मामले निरंतर वृद्धि में हैं साथ ही जनसंख्या के आधार से देशभर में हमारा प्रदेश 14वां स्थान में है, जबकि बाकि राज्य हमसे कई बेहतर स्थिति में है, उत्तराखंड में 2016 के मुकाबले 2018 के बीच साइबर अपराध में दो गुना से की बढ़ोतरी हुई है ।

साइबर क्राइम का कारण

साइबर अपराध किस कारण होते हैं
धोखाधड़ी के उद्देश्य से
शरारत के लिए
यौन उत्पीड़न
बदनामी करने के लिए
शोषण करने ले उद्देश्य

साइबर क्राइम के लिए कैसे करे कंप्लेंट जानते हैं-
1- सबसे पहले एक साइबर अपराध की कंप्लेंट रजिस्टर करें और ध्यान रखे अपराध कंप्लेंट लिखित में हो और अपने ही शहर या आप – पास के साइबर क्राइम सेल में हो!
2- जब कोई साइबर क्राइम कंप्लेंट रजिस्टर करें तब अपना नाम, पूरा पता, दूरभाषा नंबर अवश्य दें, इसके बाद आपको एक लिखित शिकायत HEAD OF THE CYBER CRIME CELL को देनी होती है, जहाँ आपने कंप्लेंट फाइल की थी !
3- अगर आप ऑनलाइन हरस्मेंट के शिकार हुए हैं, तो आपको एक लीगल काउंसिल असिस्ट ( legal counsel assist ) कर सकता है, आपको पुलिस स्टेशन में कुछ दस्तावेज जमा करने पड़ सकते हैं !
4- अगर आपके शहर में कोई साइबर क्राइम सेल नहीं हो तो आप एफ0 आई0 आर0 (FIR) के माध्यम से भी शिकायत दर्ज कर सकते हैं अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन में और अगर आपकी शिकायत वहां दर्ज नहीं की जा रही है, तो आप पुलिस कमिश्नर से भी शिकायत कर सकते हैं और संज्ञान दे सकते हैं!

उत्तराखंड में कंप्लेंट रजिस्टर करने के लिए ऑनलाइन लिंक
Government of Uttrakhand, Home Dept.,Uttrakhand Police, (uk.gov.in)

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