डिजिटल धोखाधड़ी – कुछ ही मिनट्स में कर सकता है आपका अकाउंट शून्य।

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स्मार्टफ़ोन और इंटरनेट ने हमारी ज़िंदगी को पहले से काफी आसान बना दिया हैं। अब ये हमारे जीवन का एक हिस्सा बन चुके हैं।  सोशल मीडिया ने हमारी ज़िंदगी को मनोरंजन से भर दिया है। लेकिन इससे ऑनलाइन फ्रॉड यानी धोखाधड़ी और जालसाज़ी भी बढ़ गई है। जिनके बारे में हम आए दिन सुनते रहते हैं। लेकिन फिर भी ऑनलाइन-फ्रॉड का हर मामला पुलिस में दर्ज नहीं होता, इसलिए कहना मुश्किल है दुनिया में हर दिन कितने लोग इस धोखाधड़ी का शिकार बनते हैं।

फोन में ही सारी सुविधाएं होना हमारे जीवन को आसान तो बनाता है। लेकिन, ‘दुर्भाग्य की बात ये है कि ऑनलाइन-फ्रॉड बहुत तेज़ी से होता है। कोई भी कुछ ही सेकंड्स में आपका पैसा और सारा डेटा चुरा सकता है। लेकिन क्या ऑनलाइन फ्रॉड को रोका जा सकता है?

रेचेल टोबेक, एक एथिकल हैकर (एथिकल हैकर किसी के साथ फ्रॉड नहीं करते बल्कि हैकिंग कैसे हो सकती है इस पर रिसर्च करते है) हैं। जो बताती हैं, ‘कंपनियां मेरी सेवाएँ लेती हैं, ये जानने के लिए उनके सिस्टम में कहां-कहां लूप-होल्स हैं जहां ऑनलाइन-फ्रॉड हो सकता है। मैं उनके पैसे और डेटा में सेंध लगाती हूं, ताकि उन्हें पता चल सके कि कौन सी कड़ी कमज़ोर है और इसकी मरम्मत किस तरह करनी है“।

इस तरह मंज़ूरी लेकर सहमति से की जाने वाली हैकिंग को व्हाइट हैट हैकिंग कहा जाता है। कंपनियां इसके लिए एथिकल हैकर्स की मदद लेती हैं। रेचेल टोबेक हैकर्स की तरह सोच कर किसी कंपनी की सायबर सिक्योरिटी को उन्नत करने के लिए सुझाव देती है। रेचेल बताती हैं, ‘मैलवेयर अटैक से बड़े बड़े ऑर्गेनाइजेशंस भी घबराते हैं क्योंकि इससे उनका पूरा डेटा चोरी हो जाता है। इसमें यूज़रनेम्स, पासवर्ड्स, एड्रेस, फोन-नंबर्स जैसी अहम जानकारियां होती हैं।

ऑनलाइन शॉपिंग और बैंकिंग सिस्टम में अपने कस्टमर को ऑनलाइन-फ्रॉड से बचाने के लिए किसी भी ट्रांजिक्शन से पहले मोबाइल पर एक कोड भेजा जाता है। रेचेल कहती हैं कि ये तरीक़ा सेफ़ तो लगता है, इसलिए इसमें भी सेंध लगाई जा सकती है।

रेचेल कहती हैं, ‘दुर्भाग्य की बात ये है कि कितनी भी कोशिश की जाए, ऑनलाइन फ्रॉड से आपको बचाना बहुत मुश्किल है, क्योंकि हर दिन हर मिनिट ना जाने कितने फिशिंग और ‘मेलेशियस डोमेन‘ बन रहे होते हैं। काउंटर पुलिस फोर्स की संख्या बढ़ाने से भी बात नहीं बनती, क्योंकि साइबर-अटैकर अपने काम को इतनी तेज़ी से अंजाम देता है कि उसे रोकने का कोई तरीका नहीं है।”

hackingसिस्टम की ख़ामियां (Loop in System)

ऑनलाइन फ्रॉड के मामलों से निपटने के लिए क़ानून बने हैं, लेकिन फैक्ट ये है कि हम ना तो ठीक से इंवेस्टीगेशन कर पा रहे हैं ना ही अपराधियों को पकड़कर सज़ा दिलाने में कामयाब हो रहे हैं”। और आए दिन ये फ़्राड बड़े जा रहे हैं।

ये मानना है टमलिन एडमंड्स का जो ऑनलाइन फ्रॉड मामलों की क़ानूनी जानकार हैं। वो ब्रिटेन में ऑनलाइन फ्रॉड के प्राइवेट मामले देखती है। उनका का दावा है कि ऑनलाइन स्कैम्स को रोका नहीं जा सकता, क्योंकि सरकारी मोर्चे पर इसके लिए कोई तैयारी, कोई योजना ही नहीं है।

ऑनलाइन-फ्रॉड करने वाले कोर्ट-कचहरी की परवाह नहीं करते। ये वो अपराधी हैं जो दुनिया के किसी भी कोने में बैठकर, दुनिया के किसी भी हिस्से में मौजूद अपने शिकार को आराम से निशाना बना सकते हैं।

टमलिन एडमंड्स कहती हैं, ‘ऑनलाइन फ्रॉड का दायरा हमारी पृथ्वी के बराबर ही बड़ा हैपैसा चोरी होकर कहां गया, इसका पता लगाते लगाते एक वक्त ऐसा आता है जब आपको पता चलता है कि अब कुछ नहीं हो सकता”

ग़लत हाथों में इस तरह का डेटा, किसी बेशकीमती ख़ज़ाने की तरह होता है। ये जानना लगभग नामुमकिन है कि ऑनलाइन-फ्रॉड के ज़रिए दुनियाभर में अब तक कितनी रकम चुराई जा चुकी है। क्योंकि कई मामलों के बारे में पुलिस तक बात पहुँचती ही नहीं। ऑनलाइन-फ्रॉड के ज़रिए चुराई गई रकम साइबर जगत में घूमकर आख़िरकार कहां पहुंची, इसका पता लगाना भी बहुत मुश्किल है। यही वजह है कि इस तरह के ज़्यादातर मामलों में केस कभी सॉल्व ही नहीं होते।

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“अपराधी हमेशा रहेंगे, हम उन्हें पूरी तरह से रोक नहीं सकते। लेकिन उनसे निपटने के तरीकों को बेहतर बनाया जा सकता है“। ये दावा है स्टेफ़न कोनान का जो साइबर सिक्योरिटी कंसलटेंट और अफ्रीकी सरकारों के एडवाइज़र हैं।

वो कहते हैं, ‘90 के दशक में मेरे देश में बैंक डकैती बहुत होती थींसोलह साल के लड़के बैंक लूट लेते थे, लेकिन 15 साल बाद बैंक डकैती पूरी तरह बंद हो गईं।  बैंक लूटने के लिए हथियार और दूसरे साजो-सामान की ज़रूरत होती है। जान का जोखिम तो था। बदलते समय के साथ यही अपराधी साइबर क्राइम की दुनिया में शिफ्ट हो गए, क्योंकि यहां जोखिम बहुत कम था और लूट का मुनाफ़ा कहीं ज़्यादा“।

इंटरनेट का दाम इतना कम हो गया कि हर एक के हाथ में स्मार्ट फोन हैं। हर कोई साइबर जगत को टटोलने लगा है। जैसे-जैसे दुनिया डिजिटल होती गई, साइबर क्राइम का ग्राफ़ बढ़ता गया।” मोबाइल बैंकिग का दौर आते ही ऑनलाइन फ्रॉड करने वालों की और ज्यादा चांदी हो गई।

भारत में अख़बारों में ऑनलाइन धोखाधड़ी, हेराफ़ेरी या जालसाज़ी की ख़बरें आपको लगभग हर दिन नज़र आएंगी। कभी कोई फोन कॉल, कोई एसएमएस या ईमेल आपको भी आया होगा, जिसमें कभी रोमांस, कभी सेक्स, कभी लॉटरी या किसी किस्म का अपडेट करने के लिए कोई लिंक क्लिक करने के लिए आपको भेजी गई होगी, या आपसे कुछ ख़ास जानकारी मांगी होगी। हर हाथ में स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के बढ़ते चलन ने दुनिया को मानों डिजिटल पंख लगा दिए हैं, जिसमें फ्रॉड के तौर-तरीके भी डिजिटल हो गए हैं।

अनलाइन फ्रॉड से कैसे बचें।(How to avoid online fraud)

सही जानकारी, पर्याप्त सावधानी और कॉमन सेंस आपकी मेहनत की कमाई को लुटने से बचा सकते हैं। सावधानी न बरतने का अंजाम लोगों को भुगतते हम देख ही सकते हैं।

अक्सर हम ऑनलाइन ऑर्डर करते हैं। कई वेबसाइट्स कई बार अविश्वसनीय और लुभावने मूल्य पर प्रोडक्ट या सेवाएँ ऑफर करते है, जो हमें अपनी तरफ आकर्षित करते हैं। हालांकि ये सारे ऑफर झूठे नहीं हो सकते लेकिन ये नहीं कहा जा सकता कि इनमें से कौन-सा ऑफर आपको फ़साने के लिए हैं। जो वास्तव में कभी डिलीवर ही नहीं होते या इतने घटिया होते है कि आपके पास पछताने और ऑनलाइन शॉपिंग का बुरा अनुभव मिल जाता है।

हमें इस तरह के ऑफर से बचने और धोखे में न आने के लिए अपनी सूझबूझ का इस्तेमाल करना होगा। जैसे अगर कोई आपसे बेहद लुभावनी क़ीमत में मिलने वाली चीज के लिए आपसे अड्वान्स डिमांड करे, और आप तक कोई सामान कभी पहुंचे ही ना। या हो सकता है प्रोडक्ट आप तक पहुँचने से पहले आपसे फ़ोन पर OTP मांग कर डिलीवरी दिखा दी जाये या आपके खाते से पैसे निकाल लिये जायें।

साथ ही, किसी ने आपको भुगतान करना हो – तब कोई आपसे UPI पिन मांगे, या आपको किसी तरह का OTP मांगे, तो समझ जायें आपके साथ कोई ऑनलाइन फ्रॉड करने जा रहा है। क्योकि भुगतान प्राप्त करते समय किसी भी चीज को फ़ोन में डालने की आवश्यकता नहीं होती। अनजान लोगों के साथ कभी भी बैंक या निवेश पोर्टफोलियो विवरण जैसी महत्वपूर्ण जानकारी साझा न करें। बैंक लेनदेन करते समय एक सुरक्षित इंटरनेट कनेक्शन का उपयोग करें, अधिमानतः अपने घरेलू वायरलेस नेटवर्क का ही इस्तेमाल करें। और अपने पासवर्ड को समय समय पर बदलते रहें और किसी के साथ शेयर ना करें।

ऑनलाइन शॉपिंग या ऑनलाइन बैंकिंग के लिए पब्लिक वाई-फाई के इस्तेमाल से बचें। फिशिंग ईमेल पर पैनी नजर रखें। जब आप अपने वित्तीय संस्थानों, बैंक, या म्युचुअल फंड से कोई महत्वपूर्ण ईमेल प्राप्त करते हैं तो स्रोत ईमेल पते की जांच करें। साथ ही किसी भी अनजान लिंक में क्लिक न करें। ऐसे कई ओर चीजे हो सकती हैं जहां आपको अपने कॉमन सेंस का इस्तेमाल करना होगा, और इन चीजों को समझना होगा।

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