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Munsyari: आधा संसार, एक मुनस्यार

by Neha Mehta

Uttarakhand: उत्तराखंड के बेहद खूबसूरत हिल स्टेशन में से एक है मुनस्‍यारी। यह उत्तराखंड में जिला पिथौरागढ़ जिले में स्थित है, यह स्थान एक तिब्‍बत सीमा ओर नेपाल सीमा से लगा हुआ है।

मुनस्यारी के बस स्टेशन से एक ओर हिमालय की रेंज दिखाई देती है। जो आसमान को चूमती प्रतीत होती है। और बर्फ से ढके ये पहाड़ बेहद खूबसूरत लगते है।

मुनस्‍यारी में ठहरने के लिए कई होटल, लॉज और गेस्‍ट हाउस है। गर्मी के सीजन में यहां के होटल खचाखच भरे रहते है इसलिए इस मौसम में वहां जाने से पहले ठहरने के लिए कमरे की बुकिंग जरूर करा लेना चाहिए, इस समय में यहां पर देसी और विदेशी पर्यटकों बहुत अधिक संख्या में आते रहती है। विदेशी पर्यटक यहां ट्रैकिंग और माउंटेनियरिंग के लिए आते हैं।

मुनस्यारी से जुडी प्रचलित लोकोक्ति है “सार संसार एक मुनस्यार” यानी सारी दुनिया की सुन्दरता एक और, अकेले मुनस्यारी का सौन्दर्य एक और, कुछ लोग इस कहावत को, आधा संसार, एक मुनस्यार अथवा सात संसार, एक मुनस्यार भी कहते हैं, हिमालय की तलहटी में बसे इस स्थान को प्रकर्ति ने सजाने के लिए कुछ अपने बहुमूल्य उपहार दिए हैं। जो मन को एक असीम प्रसन्नता और शांति का अनुभव देता है।

यहां की पहाड़ियों में दूर दूर पहाड़ो में घूमती सड़के भी दिखाई देती हैं। हांलाकि सड़के बनाना, समय की जरुरत हैं, लेकिन ऐसी संवेदनशील स्थानों पर जितना कम कंस्ट्रक्शन हो, उतना अच्छा। ऐसे स्थान तो बस प्राकृतिक प्रदत मार्गों पर चलने के लिए बनें हैं, जो लोग इन पहाड़ों में रहने के लिए श्रम नहीं कर सकते, वो यहाँ survive भी नहीं कर सकते, प्रकृति प्रेमियों के लिए यहाँ ट्रैकिंग हेतु अनेकों सुन्दर डेस्टिनेशन हैं।

मुनस्यारी की सुंदरता देखते ही बनती है। थल और नाचनी के बाद मुनस्यारी से 50-55 किलोमीटर पहले से ही मुनस्यारी के सौंदर्य की झलक मिलने लगती हैं। रास्ते के खुबसूरत गाँव, सीढ़ीनुमा खेत, सड़क के किनारे जल स्रोत, जल प्रपात, रास्ते के बीच से गुजरती भेड़ों का समूह, अलग – अलग बर्ड्स की species और यहाँ के अद्भुत लैंडस्केप, हर दृश्य अपनी और सम्मोहित करते हैं।

मुनस्‍यारी विशाल हिमालय श्रृखलाओं से घिरा हुआ है। मुनस्‍यारी के सामने विशाल हिमालय पर्वत श्रंखला का विश्‍व प्रसिद्ध पंचाचूली पर्वत (हिमालय की पांच चोटियां) जिसे किवदंतियो के अनुसार पांडवों के स्‍वर्गारोहण का प्रतीक माना जाता है, बाई तरफ नन्‍दा देवी और त्रिशूल पर्वत, दाई तरफ डानाधार जो एक खूबसूरत पिकनिक स्‍पॉट भी है और पीछे की ओर सुन्दर बुग्याल खलिया टॉप है।

नन्दा देवी मंदिर

नंदा देवी मंदिर यहां का एक मुख्य दर्शनीय स्थल है, जो मुनस्यारी के मुख्य बाज़ार से कुछ ही किलोमीटर दूर मुनस्यारी – मदकोट रोड में हैं। अत्यंत रमणीय स्थान में स्थित मंदिर का अत्यंत सुन्दर हैं, समतल मैदान के एक किनारे मंदिर और सुन्दर गार्डन और समाने हिमालय, जैसे कोई मास्टर पीस कोई सुन्दरतम पेंटिंग सामने आ गयी हो। इसके आसपास – कुछ फलदार और चौड़ी पत्तियों के पेड़ हैं, और जहाँ विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों को देखा जा सकता हैं।

मुनस्यारी में मां नंदा देवी मंदिर से नंदा देवी पर्वत श्रृंखला के अद्भुत दृश्य दिखाई देते हैं।

मुनस्यारी कैसे पहुँचे

मुनस्यारी के नजदीकी रेलवे स्‍टेशन काठगोदाम है। हल्‍द्वानी से मुनस्‍यारी की दूरी लगभग 295 किलोमीटर है। सुप्रसिद्ध लेक हिल स्टेशन नैनीताल मुनस्यारी से 265 किलोमीटर है।

काठगोदाम से मुनस्‍यारी की यात्रा सड़क मार्ग से करते हुए राह में कई खूबसूरत स्थल मिलते है । काठगोदाम से चलने पर भीमताल, जो नैनीताल से मात्र 10 किलोमीटर है, आता है उसके बाद वर्ष भर ताजे आर्गेनिक फलों के लिए प्रसिद्ध स्थल भवाली मिलता हैं इसके बाद गरम पानी, खैरना होते हुए एतिहासिक शहर अल्मोड़ा हैं।

अल्मोड़ा से चितई तीन अलग अलग मार्ग हैं, किसी से भी मुनस्यारी जा सकते है, ये तीनों रूट –
पहल रूट- अल्मोड़ा से कसार देवी – बिनसर, ताकुला और बागेश्वर होते हुए।
दूसरा – अल्मोड़ा से चितई – धौलछिना, बेरीनाग होते हुए।
तीसरा – अल्मोड़ा से कौसानी, गरुड़, बागेश्वर होते हुए।

बागेश्वर से आगे जाने पर चौकोदी और धौलछीना, बेरीनाग और चौकोड़ी अपनी खूबसूरती के लिए काफी प्रसिद्ध है। यहां से आगे चलने पर थल, नाचनी, टिमटिया, क्‍वीटी, डोर, गिरगॉव, रातापानी और कालामुनि आते हैं। कालामुनि पार करने के बाद आता है मुनस्‍यारी, जिसकी खूबसूरती अपने आप में निराली है।

लोग पहाड़ी स्‍थानीय बोली बोलते है और हिन्‍दी भाषा का प्रयोग भी करते हैं। यहां के अधिकतर लोग कृषि कार्य में लगे हुए है।

मुनस्यारी के बारे में और जाने के लिए क्लिक करें।

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