उत्तराखंड समाचार 18 मार्च 2021

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Uttaranchal News 18 March

एक्शन में सीएम तीरथ सिंह रावत, भ्रष्टाचार के मामले में दो अभियंता निलंबित

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत पूरी तरह एक्शन मोड में हैं। लक्ष्मणझूला-कांडी-दुगड्डा-रथुवाढाब-धुमाकोट मार्ग के नवीनीकरण के काम की खराब गुणवत्ता की गाज संबंधित सहायक अभियंता अजीत सिंह और अपर सहायक अभियंता अनिल कुमार पर गिर गई। उक्त दोनों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने बुधवार को अपनी कार्रवाई से साफ कर दिया है कि भ्रष्टाचार पर जीरो टालरेंस की नीति से किसी सूरत में समझौता नहीं किया जाएगा। स्वर्गीय जगमोहन ङ्क्षसह नेगी राज्य राजमार्ग संख्या-नौ (लक्ष्मणझूला-कांडी-दुगड्डा-रथुवाढ़ाब-धुमाकोट) के दो किमी के हिस्से पर अलग-अलग टुकड़ों में नवीनीकरण का कार्य किया गया। यह कार्य लोक निर्माण विभाग निर्माण खंड-दुगड्डा की ओर से कराया गया है। बीती 15 मार्च को रिखणीखाल निवासी देवेश आदमी ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए किमी-155 पर मलयखांद बैंड पर बिछाए गए डामर का एक वीडियो इंटरनेट मीडिया पर वायरल कर दिया था।

निर्माण कार्य की घटिया गुणवत्ता के वायरल वीडियो को मुख्यमंत्री ने गंभीरता से लिया। मुख्यमंत्री के निर्देश पर लोक निर्माण विभाग निर्माण खंड-दुगड्डा के अधिशासी अभियंता ने बीते रोज मौके पर जाकर मुआयना किया। शासन को भेजी गई उनकी जांच रिपोर्ट में घटिया निर्माण की पुष्टि की गई।

जांच में पाया गया कि मार्ग के निर्माण कार्य में ठेकेदार ने सड़क की सतह ठीक तरह से सफाई नहीं की। साथ में गीली सतह पर टैक कोट डाला गया। इस वजह से टैक कोट की पुरानी सतह से बांडिंग नहीं हो पाई और सतह उखड़ गई। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि सहायक अभियंता अजीत सिंह व अपर सहायक अभियंता अनिल कुमार ने दायित्व को ठीक तरीके से नहीं निभाया। आरोपों की प्रकृति इस तरह की है कि विस्तृत जांच में पुष्टि होने पर उन्हें कड़ा दंड दिया जा सकता है। इस रिपोर्ट के आधार पर शासन ने उक्त दोनों अभियंताओं को निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि में उक्त दोनों लोक निर्माण विभाग मुख्य अभियंता कार्यालय पौड़ी से संबद्ध रहेंगे।

20 किमी उल्टी दौड़ी दिल्ली से आ रही पूर्णागिरि जनशताब्दी एक्सप्रेस, बाल-बाल बचे 60 यात्री

अक्सर हमने फिल्मों में ट्रेन को अनियंत्रित होकर विपरित दिशा में स्पीड से दौड़ते देखा है, लेकिन बुधवार को टनकपुर बनबसा के लोगों ने यह भयावह दृश्य अपनी आंखों से देखा। यह देख लोगों के रौंगटे खड़े हो गए। घटना बुधवार शाम की है। दिल्ली से टनकपुर पहुंच रही जनशताब्दी जब मनिहारगोठ पहुंची तो गाय के ट्रेन से टकराकर कटने के बाद इंजन का प्रेशर डाउन हो गया। जिससे ट्रेन आगे बढऩे के बजाय पीछे की ओर अनियंत्रित स्पीड से दौडऩे लगी। ट्रेन में सवार करीब 60 यात्री करीब 20 किमी दूर खटीमा के पास नदन्ना नदी के पास जाकर रुकी। ट्रेन की रुकने तक सवारियों की सांसे अटकी रही। बुधवार शाम करीब पौने पांच बजे दिल्ली से टनकपुर आ रही पूर्णागिरि जन शताब्दी एक्सप्रेस (5326) मनिहारगोठ पहुंची तो पहले सिग्नल के पास एक मवेशी से टकरा गई। ट्रेन की स्पीड अधिक होने के कारण मवेशी कट गई। जिससे ट्रेन का प्रेशर पाइप फटने से प्रेशर डाउन हो गया। प्रेशर कम होने के बाद ट्रेन आगे बढऩे के बजाय पीछे की ओर जाने लगी।

ड्राइवर ने ब्रेक मारने का काफी प्रयास किया, लेकिन ट्रेन नहीं रुकी और उसकी स्पीड बढ़ती चली गई। ट्रेन में दो एसी व आठ सामान्य बोगियां थी। जिसमें करीब 60 यात्री सवार थे। ट्रेन को पीछे जाते देख सवारियां परेशान होने लगी। जिससे की कोई हादसा न हो सके। ट्रेन के आने के बाद पीछे सभी रेलवे क्रॉसिंग के गेट खोल दिए गए थे। ट्रेन पहले बनबसा फिर चकरपुर पहुंची और बाद में खटीमा से करीब पांच किमी पहले नदन्ना नदी के पास जाकर रुक गई। ट्रेन के पीछे जाने पर सभी को अलर्ट कर दिया था। ट्रेन के रुकते ही सवारियां में जान में जान आई और अपना सामान लेकर भाग खड़े हो गए। सूचना पर रेलवे के कई उच्चाधिकारी मौके पर पहुंच गए। मामले में रेलवे के स्टेशन अधीक्षक डीएस धरियाल से बात करने का प्रयास किया गया लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।

पूर्णागिरी जनशताब्दी एक्सप्रेस के उल्टी दौड़ने के मामले में लोको पायलट और गार्ड समेत तीन सस्पेंड

दिल्ली से टनकपुर जा रही पूर्णागिरि जनशताब्दी एक्सप्रेस के रोलडाउन होकर उल्टी दिशा में दौड़ने के मामले में लोको पायलट, सहायक लोको पायलट और गार्ड को सस्पेंड कर दिया गया है। ट्रेन को खटीमा के गेट संख्या 35 पर सुरक्षित रोक लिया गया। हादसे के समय ट्रेन में 64 यात्री सवार थे। सभी यात्रियों के सुरक्षित रहने से रेलवे ने भी राहत की सांस ली है। सभी यात्रियों को सड़क मार्ग से बस द्वारा भेजा गया। अधिकारियों का कहना है कि एक गाय के इंजन से टकराने के बाद ब्रेक नहीं लगने से हादसा हुआ।

बताया जा रहा है कि दिल्ली से पीलीभीत होकर टनकपुर जा रही पूर्णागिरि जन शताब्दी एक्सप्रेस टनकपुर में होम सिग्नल से जैसे ही गुजर रही थी वहां एक गाय ट्रेन की चपेट में आ गई। चालक दल ने ब्रेक लगाकर ट्रेन को रोका। इसके बाद जब ट्रेन को आगे बढ़ाने के लिए वैक्यूम खींचा गया तो आश्चर्यजनक रूप से ट्रेन टनकपुर जाने के बजाए विपरीत दिशा में (रोलडाउन)  चलने लगी। ट्रेन में सवार सभी 64 यात्री भी पीछे को जा रही ट्रेन को देखकर दंग रह गए। ट्रेन को बमुश्किल खटीमा में गेट संख्या 35 पर रोका जा सका। सीपीआरओ पंकज सिंह ने बताया कि तत्काल मामले की जांच शुरू कर दी गई। लोको पायलट, सहायक लोको पायलट और गार्ड पर को सस्पेंड किया गया है।

ट्रैक पर छोटे-छोटे पत्थर डालकर रोकी ट्रेन
टनकपुर रेलवे स्टेशन के अधीक्षक डीएस दरियाल ने बताया कि ट्रेन रिवर्स होने की सूचना मिलते ही रेल कर्मियों को अलर्ट कर दिया गया था। ब्रेक फेल हो चुके थे। लिहाजा ट्रेक अवरुद्ध करके ही ट्रेन रोकना एकमात्र विकल्प रह गया था। बताया कि इसी के चलते रेलवे कर्मियों ने इस ट्रेक पर जगह-जगह छोटे-छोटे पत्थर बिछा दिए थे। इससे ट्रेन की रफ्तार धीरे-धीरे कम हो गई। रफ्तार कम होने पर ही ट्रेन रुक पाई। अधीक्षक के मुताबिक यदि ट्रेक पर बड़े पत्थर डाल दिए जाते तो ट्रेन के पलटने का खतरा हो सकता था।

24 घंटे में 110 संक्रमित मिले, मरीजों की संख्या 98 हजार पार

उत्तराखंड में कोरोना संक्रमित मामले फिर बढ़ने लगे हैं। सवा महीने बाद एक दिन में सबसे अधिक 110 कोरोना संक्रमित मरीज मिले हैं, जबकि संक्रमित मरीजों की मौत के मामले थमे हैं। कुल संक्रमितों का आंकड़ा 98 हजार पार हो गया है। वहीं, बुधवार को 35 मरीजों को स्वस्थ होने के बाद घर भेजा गया है।

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार बुधवार को 12085 सैंपलों की जांच रिपोर्ट निगेटिव आई है। वहीं, सात जिलों में 110 लोग संक्रमित मिले हैं। देहरादून जिले में सबसे अधिक 40 लोग संक्रमित मिले हैं। जबकि हरिद्वार में 34, ऊधमसिंह नगर में 18, नैनीताल में 13, पौड़ी व पिथौरागढ़ में दो-दो और अल्मोड़ा जिले में एक संक्रमित मिला है।

देश के कई राज्यों में संक्रमण फैलने के बाद में प्रदेश में फिर से कोरोना संक्रमितों का बढ़ना चिंताजनक है। 23 जनवरी 2021 को प्रदेश में 122 कोरोना संक्रमित मिले थे। इसके बाद आज 17 मार्च को सबसे अधिक संक्रमित मिले हैं।

बीते 24 घंटे के भीतर प्रदेश में एक भी संक्रमित मरीज की मौत नहीं हुई है। अब तक1704 कोरोना मरीजों की मौत हो चुकी है। वहीं, 35 मरीजों को स्वस्थ होने के बाद घर भेजा गया है। इन्हें मिला कर 94250 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। वर्तमान में 672 सक्रिय मरीजों का इलाज चल रहा है।

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कोविड टीकाकरण को मिशन मोड के तहत चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को यह निर्देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वीडियो कांफ्रेंस पर हुई बैठक के बाद दिए।

कोरोना संक्रमण के प्रभावी नियंत्रण के लिए प्रधानमंत्री ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से संवाद के लिए वीडियो कांफ्रेंस बैठक की। इस बैठक में उत्तराखंड पर चर्चा नहीं हो सकी। बैठक में शामिल मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने बाद में अधिकारियों को निर्देश दिए कि कोविड पर प्रभावी नियंत्रण के लिए जन जागरूकता पर विशेष ध्यान दिया जाए। कोविड टीकाकरण मिशन मोड पर चलाया जाए। आवश्यकता पड़ने पर वैक्सीनेशन सेंटर बढ़ाए जाए। दवाई के साथ कड़ाई भी जरूरी है।

लोगों को दो गज दूरी, मास्क की अनिवार्यता एवं स्वच्छता पर विशेष ध्यान रखने के लिए जागरूक किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आरटीपीसीआर टेस्ट पर भी विशेष ध्यान दिया जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि अधिकांश आरटीपीसीआर टेस्टिंग हो। यदि किसी क्षेत्र में कोरोना के अधिक मामले आते हैं, ऐसे क्षेत्रों में माइक्रो कंटेंनमेंट जोन बनाए जाएं। टेस्ट, ट्रेक एवं ट्रीट पर विशेष ध्यान दिया जाए। इस अवसर पर मुख्य सचिव ओम प्रकाश, सचिव स्वास्थ्य अमित नेगी, डायरेक्टर मेडिकल एजुकेशन युगल किशोर पंत एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

 

सुविधाओं को लेकर किन्नर अखाड़ा नाराज, संतों ने की CM से की मुलाकात

मूलभूत सुविधाएं न मिलने से नाराज किन्नर अखाड़े ने बुधवार को देहरादून में मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत से मुलाकात कर अपनी समस्याओं को बताया। सीएम ने अन्य अखाड़ों की तर्ज पर किन्नर अखाड़े को भी मूलभूत सुविधाएं देने का भरोसा दिलाया।

अन्य अखाड़ों की तरह सुविधाएं न मिलने से मंगलवार को किन्नर अखाड़ा नाराज हो गया था। सुविधाएं न मिलने पर एक निजी भूमि पर किन्नर अखाड़े ने अपने कैंप लगाने की घोषणा करते हुए भूमि पूजन किया था। शाम को ही किन्नर अखाड़े ने मेलाधिकारी दीपक रावत से भी मुलाकात की थी। बुधवार को भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के प्रदेश महामंत्री हरजीत सिंह की अगुवाई में किन्नर अखाड़ा की आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी एवं अन्य सदस्य देहरादून में मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के आवास पर पहुंचे। मुख्यमंत्री के सामने आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने अपना पक्ष रखा। महामंडलेश्वर ने मांग की है कि अन्य अखाड़ों की तर्ज पर उन्हें भी मूलभूत सुविधाएं दी जानी चाहिए।

करीब आधा घंटा चली मुलाकात में मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि 20 मार्च को होने वाली हरिद्वार में कुंभ को लेकर बैठक में सभी मुद्दों पर चर्चा होगी। मुख्यमंत्री ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि सभी समस्याओं का निदान किया जाएगा। मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद किन्नर अखाड़ा ने मुख्यमंत्री एवं भाजयुमो नेता हरजीत सिंह का आभार जताया। मुलाकात करने वालों में महामंडलेश्वर पवित्रा, नंदा गिरी, कोमल, गायत्री, भगवती, दुर्गा, रीना आदि शामिल रहे।

आरती उताकर किया स्वागत 
मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत और उनकी पत्नी डॉ. रश्मि रावत ने किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी के साथ ही अन्य किन्नरों की आरती उतारकर स्वागत किया। किन्नरों ने भी मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी को आशीर्वाद दिया।

मुख्यमंत्री से मिलकर अखाड़ा गदगद 
मुख्यमंत्री की ओर से आश्वासन मिलने के बाद किन्नर अखाड़ा गदगद है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पर उन्हें पूरा भरोसा है कि वह अखाड़े की समस्याओं पर जरूर ध्यान देंगे।

नहीं चाहिए रुपये
कई अखाड़ों को कुंभ में एक-एक करोड़ रुपये सरकार की ओर से कार्य कराने के लिए दिए गए हैं। अन्य अखाड़ों की तरह रुपयों लेने की बात पर पूछे गए सवाल पर आचार्य महामंडलेश्वर ने कहा कि उन्हें सरकार की ओर से एक रुपया भी नहीं चाहिए। लेकिन सरकार बस उनकी छावनी में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करा दे।

एक्शन में दिखे मंत्री गणेश जोशी, कहा- नहीं हटाए जाएंगे उपनल के 22 हजार कर्मचारी

प्रदेश के सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी पहले ही दिन एक्शन में दिखे। उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड (उपनल) के माध्यम से विभिन्न विभागों से संविदा पर सेवायोजित कर्मियों को उन्होंने बड़ी राहत दी है। बीती 25 फरवरी को जारी उपनल कर्मियों की सेवा समाप्ति से संबंधित आदेश को उन्होंने तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। मंत्री के निर्देश के बाद उपनल के उप महाप्रबंधक कर्नल (सेनि) मनोज रावत ने भी शाम को इस संदर्भ में आदेश जारी कर दिए हैं। उन्होंने सभी विभागों व निगमों (जहां उपनल के माध्यम से कर्मचारी तैनात हैं) को लिखा है कि उपनल द्वारा प्रायोजित कर्मियों की सेवाएं समाप्त न की जाएं।

उपनल के माध्यम से विभिन्न विभागों व निगमों में 22 हजार से अधिक कर्मचारी संविदा पर तैनात हैं। नियमितीकरण व समान कार्य के लिए समान वेतन देने की मांग को लेकर ये कर्मचारी पिछले 24 दिन से आंदोलित हैं। उपनल प्रबंधन ने बीती 25 व 26 फरवरी को आदेश जारी किया था कि आंदोलन में शामिल जो कर्मचारी पांच दिन के भीतर कार्य पर वापस नहीं लौटेगा, उसकी सेवा समाप्त कर दी जाएगी। हालांकि इसके बाद भी उपनल कर्मी आंदोलन पर डटे हुए हैं। इस बीच बुधवार को सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक की।    बैठक में उपनल कर्मचारी महासंघ के पदाधिकारी भी शामिल रहे। सैनिक कल्याण मंत्री ने कहा कि उपनल कर्मियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं किया जाएगा। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि पूर्व में सेवा समाप्ति से संबंधित जो आदेश जारी किया गया है, उसे तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए। इसके बाद उपनल प्रबंधन की ओर से आदेश जारी कर कहा गया है कि किसी भी उपनल कर्मचारी की सेवा समाप्त नहीं की जाएगी। बैठक में रायपुर विस क्षेत्र के विधायक उमेश शर्मा काऊ, अपर सचिव सैनिक कल्याण प्रदीप सिंह रावत, उपनल के प्रबंध निदेशक ब्रिगेडियर (सेनि) पीपीएस पाहवा, उपनल कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष कुशाग्र जोशी, महामंत्री हेमंत रावत आदि भी मौजूद रहे।

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