प्रदेश में बढ़ती हुई आत्महत्याएं चिंताजनक

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प्रदेश में बढ़ रही आत्महत्या की घटनाएँ बहुत ही चिंताजनक है कोरोना महामारी के चलते लाखो लोग जो रोज कमाने वाले, होटलो,अन्य निजी क्षेत्रों में काम करने वाले लोग पिछले कई महीनों से बेरोजगार पड़े है। इसमें सबसे ज्यादा समस्या उन लोगो को हो रही है जिनके पास जमा पूंजी बहुत कम है। वैसे भी इतने महीनो तक जमा पूंजी का ख़तम होंना भी स्वाभाविक है। कई लोग इस कारण घर चलाने में लाचार से हो गए है स्थिति यह की आमदनी अठन्नी खर्चा रुपया है।

अब ऐसे में व्यक्ति का डिप्रेशन में जाना तय है। मानसिक तनाव के कारण लोग दिन पर दिन आत्महत्या कर रहे हैं।

अभी तक प्रदेश मैं लगभग 100 लोग आत्महत्या कर चुके है इसमें ज्यादा तर वह लोग है जिनके ऊपर पारिवारिक जिम्मेदारियाँ है। कुछ दिन पहले हल्द्वानी की यह घटना बहुत हृदय विदारक थी जहां हल्द्वानी में एक मां ने तीन बच्चों के साथ जहर खाया था वही नैनीताल में एक व्यक्ति ने झील में छलांग लगाकर जान देने की कोशिश की थी. ऐसी अनेक घटनाएं प्रदेश के अंदर हो चुकी है।
इस सबका जिम्मेदार कोन है। जिम्मेदार सरकार भी है। और वो सम्पन लोग भी है जो अपने आस पड़ोस मैं रहने वाले ऐसे लोगो की कोई मदद नहीं करते है।

हालाकिं राज्य सरकार राशन व आर्थिक मदद तो दे रही है। लेकिन वह अपर्याप्त है।
राज्य सरकार को इस दिशा में चिंतन करने की जरुरत है। जिन लोगो के ऊपर परिवार चलाने की जिम्मेदारी है। और वर्तमान में बेरोजगार है। ऐसे लोगो का सही आकलन करके प्रदेश सरकार को जब तक स्थिति सामान्य नहीं हो जाती तब तक उन्हें हर महीने आर्थिक मदद देनी चाहिए।
सामाजिक क्षेत्र के लोगों को भी ऐसे लोगो की मदद करने का प्रयास करना चाहिए।

आत्महत्या किसी भी समस्या का संमाधान नहीं है। ऐसे लोगो को समस्याओं का खुलकर सामना करना चाहिए। उनको इस तरह से नहीं हारना चाहिए। वे किसी भी समस्या के आने पर अपने परिजनों व नजदीकियों से अपने मन की बात जरूर सांझा करें।

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