जन्मदिन का सीक्रेट गिफ्ट

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यह कहानी है एक छोटी सी लड़की की जिसका नाम है पलक और वह अपने पापा की लाडली बेटी मात्र 9 साल की है। उसका बर्थडे आने वाला होता है। हर साल की तरह उसे इस बार भी अपने पापा से एक अच्छा सा गिफ्ट मिलने की उम्मीद होती है।

उसके पापा भी उसके बर्थडे से 1 महीने पहले ही गिफ्ट के बारे में सोचने लगते है की, वह अपनी बिटिया को इस बार कौन सा गिफ्ट देंगे।

लेकिन उसके पापा के द्वारा क्या गिफ्ट दिया जा रहा है, यह पलक के बर्थडे के दिन ही पता चलता था, बर्थडे से पहले वह सीक्रेट बिल्कुल भी ओपन नहीं करते थे। इसलिए पलक के लिए मुश्किल होता था अनुमान लगाना की गिफ्ट में क्या होगा। पलक हर बार अपने गिफ्ट को लेकर एक्साइटेड रहती थी।

अपने जन्मदिन वाले दिन पलक जब स्कूल से आई तो, उसने देखा कि घर पर दो छोटे-छोटे खरगोश है सफेद रंग के, जिनकी आंखें काले मोतियों की तरह चमक रही थी। पलक के पापा ने उससे कहा कि यह खरगोश तुम्हारे बड़े भैया लाए हैं। तुम इन्हें आज शाम तक अपने पास रख सकती हो, शाम को यह दोनों खरगोश जिसके हैं उसे वापस दे दिए जाएंगे और वह व्यक्ति शाम को अपने खरगोश लेने भी आयेगा। इसलिए हमें इन्हें वापस देना पड़ेगा।

पलक खरगोशों को देखकर बहुत खुश होती है। लेकिन इस बात के लिए दुखी भी होती है कि, वे दोनों खरगोश केवल शाम तक ही उसके पास रहेंगे।

वह दिन भर खरगोशों के साथ ही रहती है उनका दिन भर ख्याल रखती है उनके साथ खेलती है और उन्हें गाजर खिलाती है और उनके लिए पास के खेत से बहुत सारी बरसिंघ घास भी काट कर लाती है।

लेकिन शाम को खरगोश लेने व्यक्ति आ जाता है। और शाम को पलक का जन्मदिन भी मनाया जाता है। लेकिन वह व्यक्ति खरगोश लेने नहीं आया होता है, बल्कि वह व्यक्ति तो पलक के बर्थडे में शामिल होने आए होते हैं, जो कि उसके पापा के दोस्त होते हैं। केक कटने के बाद उसके पापा पलक को बताते हैं कि, यह दोनों खरगोश तुम्हारे ही हैं। तुम्हारे लिए ही लाए हैं। यह सुनकर पलक बहुत खुश होती है, और वह खुशी से पापा के गले लग जाती है। इस प्रकार पलक का इस बार का गिफ्ट भी स्पेशल रहा और सीक्रेट भी।

अब फलक खरगोशों के साथ रोज खेलती उनको गाजर और बरसिंघ घास खिलाती और खरगोशों के लिए उसके पापा ने लकड़ी का एक घर भी बना दिया था। पलक ने खरगोशों का नाम चुन्नू और मुन्नू रखा था। खरगोश दिन भर पूरे घर में घूमते रहते और पलक उनके पीछे पीछे भागती रहती और खरगोश मुश्किल से ही पलक के हाथ आते थे। अब घर में दिन भर यह भागमभाग चलती रहती पलक और खरगोशों की।

आपने भी अपने प्रिय जनों को बहुत सारे सीक्रेट गिफ्ट दिए होंगे। यदि आपने अभी तक किसी को सीक्रेट गिफ्ट नहीं दिया तो अब दीजिए और दूसरों की खुशी की वजह बनिए।
उम्मीद है आपको यह कहानी अच्छी लगी होगी । मिलते हैं अगली कहानी के साथ।


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