लैंसडाउन का सर कटा भूत

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लैंसडाउन गढ़वाल राइफल्स की सैनिक छावनी है । यही से भारत माँ के वीर सपूत प्रशिक्षण प्राप्त करके देश की विभिन्न सीमाओं में अपनी वीरता और साहस का परिचय देते है। सैनिकों का यह प्रसिद्ध तीर्थ है ही लेकिन यहां की दो अन्य चीज़े और प्रसिद्ध है वो है यहां के भूत और दूसरा यहां के जंगलो के बाघ (लैंसडाउन  का बीच, मेरा फवा बाघा रे) यह गीत यहां के बाघों की कहानियाँ ही बयाँ करता है।

यह किस्सा लेंस डाउन के सर कटे भूत का है जो छावनी में रात के समय सफ़ेद घोड़े में घूमता है। छावनी में ड्यूटी कर रहे सिपाहियों की निगरानी करने वाले इस सर कटे अंग्रेज के कई किस्से लैंसडाउन में आज भी सुनाये जाते हैं। कहते हैं कि यदि कोई सिपाही रात की ड्यूटी में सोता है या सही से ड्रेस नहीं पहनता तो ये भूत उसके सिर पर मारता है ताकि वो जाग जाए और अपनी ड्यूटी अच्छे से करे।

जिस भूत की यहां बात हो रही है, वो एक अंग्रेज ऑफिसर डब्लू. एच. वार्डेल की आत्मा है। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान डब्लू. एच. वार्डेल फ़्रांस में जर्मनी से लड़ता हुआ मारा गया था। दरबान सिंह नेगी के साथ लड़ने वाले इस अंग्रेज अफ़सर की लाश कभी नहीं मिली। जब युद्ध चल रहा था तब नवम्बर की किसी रात वोर्डेल बड़ी बहादुरी के साथ जर्मनों से लड़ा। युद्ध में उसकी मौत के बाद तब के ब्रिटिश अख़बारों में लिखा गया है कि वह शेर की तरह लड़ा और मारा गया। लेकिन बड़ा अफ़सोस है कि हमें ऐसे वीर का शव भी नहीं मिला लोगों का मानना है कि ठीक इसी रात लैंसडाउन की छावनी में एक अंग्रेज़ को सफ़ेद घोड़े में देखा गया । इस छावनी में नाईट ड्यूटी करने वाले बहुत से फ़ौजियों ने दावा किया है कि ड्यूटी में कामचोरी करने पर उन्हें वार्डेल ने टोका है।

डब्लू. एच. वार्डेल एक ब्रिटिश अफ़सर था जो 1912 में फर्स्ट बटालियन से जुड़ा और वह 1893 में भारत आया।1901-02 के पास उसने अफ्रीका में नौकरी की और फिर भारत लौट आया। 1911 के दिल्ली दरबार में जब राजा जार्ज पंचम आया तब उसके स्वागत में भारतीय सेना का नेतृत्व करने वाले अफसरों में एक डब्लू. एच. वार्डेल भी था प्रथम युद्ध से पहले वह लैंसडाउन में ही तैनात था मौत से पहले लैंसडाउन में पोस्टिंग होने और शव के क्रिया कर्म न होने के चलते यह माना जाता है कि 100 साल बाद आज भी डब्लू. एच. वार्डेल छावनी में घूमता है।

लैंसडौन में ‘इस सर कटे भूत’ के अलावा गढ़वाली मेस में ‘कर्नल रॉबर्ट’ नाम के भूत के भी चर्चे हैं. इनके बारे में कहा जाता है कि ये रात में स्ट्रीट लाइट के नीचे पढ़ते हैं। लोगों के अनुसार, ऐसा ही एक शरीफ़ भूत ‘बांग्ला नंबर 18’ में घूमता है, जो बिना किसी को परेशान करे डाइनिंग रूम की खिड़की से आता है और किचन की खिड़की से ठंडी हवा के झोंके की तरह चला जाता है।

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