चिंता कैसे दूर करे? how not to worry

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how not to worry

दो लफ्जों में

हमारे द्वारा ऐसे मुद्दे के ऊपर रोशनी डाली गयी है . जिसके ऊपर काफी कम बात होती है . मुद्दे का नाम है मेंटल हेल्थ और इसमें प्रैक्टिकल और लॉजिकल बातें की गयी हैं . साथ ही साथ ये भी बताया गया है कि कैसे आप अपने जीवन में छोटे – छोटे बदलाव करके बड़े परिणाम हासिल कर सकते हैं . अगर आपको भी डिप्रेशन जैसी अवस्था के बारे में डिटेल में जानकारी चाहिए तो फिर ये आपके लिए ही है .

ये किसके लिए है ?

साइकोलॉजी को करीब से समझने वालों के लिए

• जिन्हें मेंटल हेल्थ के बारे में जानना हो

• जिसे भी ऐसी समस्या हो

लेखक के बारे में

Paul McGee यूके के मशहूर मोटिवेशनल स्पीकर हैं . इन्होने अब तक 7 किताबों का लेखन किया है . मेंटल हेल्थ से जुड़े कई टॉपिक्स के ऊपर लेखक ने काफी करीब से अध्ययन किया है .

एंजायटी और स्ट्रेस ?

आज के दौर की एक सच्चाई है . वो ये है कि लोगों के जीवन में पैसों की तो बढ़ोतरी हुई है . लेकिन इसी के साथ उनकी जिंदगी में स्ट्रेस ने भी एक अलग ही जगह बना ली है . स्ट्रेस एक ऐसी बिमारी , जी हाँ ये बिमारी ही है . इसे बिमारी इसीलिए कहा जा रहा है क्योंकि इसी की वजह से कई खतरनाक बीमारियों का जन्म होता है . इसीलिए कहा गया है कि चिंता और चिता में ज्यादा फर्क नहीं है . कई बार ऐसा होता है कि आपको अपनी दिक्कत के बारे में तो अच्छे से पता होता है लेकिन आप कुछ कर नहीं पाते हैं . सीधा – सीधा कहा जाये तो आप अपनी मदद ही नहीं कर पाते हैं . अब इसके पीछे का क्या कारण होता है ? और आप मेंटल हेल्थको कैसे बेहतर रख सकते हैं ? इन सब बातों के बारे में आपको इस  में पता चल जाएगा . क्या कभी आपकी नींद रात को अचानक खुली है ? इसके बाद पूरी रात आप जागते ही रहे हों . क्या आपको भी भविष्य की चिंता में नींद नहीं आती है ? अगर ऐसा होता है तो ये एक सामान्य सी प्रक्रिया है . लेकिन तब तक जब तक एक सामान्य सी वरी किसी स्ट्रेस या एंग्जायटी का रुप नहीं ले लेती है .अगर इसे और अच्छे से समझने की कोशिश करें तो चिंता के बाद ही एंग्जायटी का जन्म होता है . एंग्जायटी के बाद आपके शरीर में कई तरह के बदलाव देखने को मिलने लगते हैं . आपको कभी – कभी महसूस हो सकता है कि आपको सांस लेने में दिक्कत हो रही है . कई बार अचानक आपकी हर्ट बीट बहुत तेज हो जाएगी . ये सब लक्षण एंग्जायटी के ही होते हैं . आपको ये बात समझना पड़ेगा कि चिंता , एंग्जायटी और स्ट्रेस आपस में कनेक्ट करते हैं . कई बार ऐसा होगा जब चिंता के बाद एंग्जायटी और स्ट्रेस का जन्म होगा . वहीं कई बार ऐसा भी हो सकता है कि स्ट्रेस के बाद चिंता और एंग्जायटी का जन्म हो . होने को कुछ भी हो सकता है . लेकिन चिंता , एंग्जायटी और स्ट्रेस आपस में जुड़े हुए हैं . इन सबसे एक साइकिल का निर्माण होता है . एक्साम्प्ल के लिए आप समझ सकते हैं . कि चिंता और डर के कारण जब एंग्जायटी का जन्म होता है तो इंसान कुछ ज्यादा ही ओवर थिंकिंग करने लगता है . कई बार ये ओवर थिंकिंग इतनी ज्यादा होती है कि उससे आदमी बेहोश तक हो जाता है . बेहोशी तो छोटी अवस्था है . स्ट्रेस और एंग्जायटी के कारण आदमी का मानसिक संतुलन भी बिगड़ सकता है . यहाँ तक कि इस अवस्था से किसी की भी जान भी जा सकती है . जब कभी भी आप इस साइकिल में फंसेंगे तो आपकी जिंदगी में कई सारे बदलाव आपको देखने को मिलेंगे . आपकी क्वालिटी ऑफ़ लाइफ खत्म हो जायेगी . इंसान की बॉडी का इम्यून सिस्टम खराब हो जाता है . यहाँ तक कि ये अवस्था इंसान की सेक्स लाइफ में भी बुरा असर डालती है .जब आपके साथ या फिर आपके किसी भी चाहने वाले के साथ ऐसा कुछ हो तो सबसे ज़रूरी होता है कि उस समय दिमाग की मदद से कुछ बेहतर फैसले लिए जाएँ . अगर इन्सान उस दौर में अच्छे और मज़बूत फैसले ले लेता है . तो फिर वो इस अवस्था से बाहर भी निकल जाता है . लेकिन असलियत में होता कुछ ऐसा है कि उस दौर में किसी का भी दिमाग काम करना बंद कर देता है . मरीज के दिमाग में एक ऐसा लूप तैयार होता है कि वो प्रेजेंट में जीना ही नहीं चाहता है .

पास्ट एक्सपीरियंस का क्या योगदान होता है ?

अगर आपको किसी भी चीज़ की चिंता है ? तो सबसे पहले शीशे के सामने खड़े हो कर कुछ सवाल खुद से करिए ? कि इस छोटी सी जिंदगी में ऐसा क्या है जिससे आप इतना परेशान हैं ? क्या वो जॉब की चिंता है ? या फिर कोई और दिक्कत है . याद रखिये चिंता जितनी भी बड़ी क्यों ना हो ? उसका कारण उतना ही छोटा होता है . अब लेखक आपको बताते हैं कि लोगों के परेशान होने का एक सबसे बड़ा कारण क्या होता है ? वो होता है उनका पास्ट . कई लोगों के साथ तो ये भी देखा गया है कि लोग अपने पास्ट का बोझ ढोते ही रहते हैं . कई लोग तो अपने बचपन की घटना को जवानी तक लेकर आते हैं . फिर होता क्या है उस चिंता से एक डर का जन्म होता है . उस डर का ऐसा असर होता है कि आपके दिमाग को एंजायटी घेर लेती है . फिर आप परेशान होते रहते हैं . पास्ट के अलावा दर्दनाक एक्सपीरियंस भी स्ट्रेस का एक महत्वपूर्ण कारण होता है . भले ही वो कोई एक्सीडेंट हो या फिर आपका कोई बेकार रिलेशनशिप . हर चीज़ का गुनाहगार आप क्यों खुद को समझ लेते हैं ? ऐसा करने से कभी भी समस्या का हल नहीं निकलता है . लोग अपने पास्ट को अपने साथ जोड़कर रखते हैं . ऐसा रखते हैं कि वो भूल जाते हैं कि उनकी जिंदगी में प्रेजेंट भी कुछ है . फ्यूचर तो बाद में आएगा . अभी तो आपको ये भी याद नहीं है कि आपकी जिंदगी में प्रेजेंट भी कुछ चल रहा है .इन सबसे बाहर आने के लिए ये समझ लीजिये कि जिंदगी ने आपका ठेका नहीं लेकर रखा हुआ है कि वो आपके सामने वही चीज़ लाएगी जैसा कि आप चाहते हैं . आपको खुद को तैयार रखना पड़ेगा कि अगर चीजें आपके हिसाब से नहीं हुई तो फिर आप क्या करेंगे ? क्या आपको खुद के ऊपर भरोसा ही नहीं है ? क्या एक ब्रेक अप के अंदर इतनी शक्ति है कि वो आपको खत्म करके रख दे . इसलिए सबसे पहले अपनी सोच को प्रैक्टिकल बनाइए . जो भी चीज़ आपके पास्ट में हो चुकी है . उसके सामने जाकर खड़े हो जाइए . उसे एक्सेप्ट करिए . सब कुछ आपकी सोच का ही खेल है . उससे बोलिए कि अब तू मुझे और परेशान नहीं कर सकता है . पास्ट को एक्सेप्ट कर लीजिये . जितनी जल्दी आप ये कर लेंगे आपकी जिंदगी में एक बड़े बदलाव की शुरुआत हो जायेगी . अगर आपको कभी किसी चीज़ से चिंता होने लगे तो फिर तुरंत उस चीज़ से दूर हट जाइए . इंसान के दिमाग के बेसिक स्ट्रक्चर को समझने की कोशिश करिए . इंसान का दिमाग ही इस तरह से बना हुआ है कि वो खतरनाक सिचुएशन को लेकर रियेक्ट करता है . चिंता किसी के भी ब्रेन के इमोशनल पार्ट का हिस्सा होती है . चलिए इसको समझने की कोशिश करते हैं . प्रिमिटिव ब्रेन सब कौसियस में मौजूद होता है . ये फ्लाइट और फाइट से डील करता है . इसका मुख्य उद्देश्य आपको जिंदा रखना होता है . लेकिन ये आपकी सेक्स ड्राइव और खान – पीन पर भी ध्यान देता है .इमोशनल ब्रेन और प्रिमिटिव ब्रेन साथ मिलकर ही काम करते हैं . दोनों साथ मिलकर ही एड्रेनालाईन और कोर्टिसोल जैसे हॉर्मोन को रिलीज करते हैं . इन्ही की वजह से आपके अंदर एनर्जी लेवल बढ़ता है . चिंता सर्वाइवल स्ट्रेटजी का हिस्सा है . इसकी वजह से आप हमेशा अलर्ट रहते हैं . दिमाग चाहता है कि आप हमेशा बुरी परिस्थति के लिए तैयार रहें . इसलिए हमेशा जब भी आपको चिंता हो . तो आप कोशिश करिए कि आपका फोकस रेशनल ब्रेन की तरफ रहे . रेशनल ब्रेन का अप्रोच प्रैक्टिकल रहता है . आगे हम समझने की कोशिश करेंगे कि आप अपने रेशनल ब्रेन का अच्छे से उपयोग कैसे कर सकते हैं ?

हर स्थति को जानना ही बचाओ की तरफ पहला कदम है

इस में हम  उस सिम्पल मेथड के बारे में जानेंगे जिसकी मदद से आप खुद को बेहतर जान पाएंगे . अगली बार जब कभी आप खुद को ऐसी सिचुएशन में पाइयेगा तो इस मेथड का यूज ज़रूर करियेगा . इस एक्सरसाइज से आपको खुद को जानने में काफी ज्यादा मदद मिलेगी . अब आते हैं इस बात पर कि इसे करना कैसे है ? सबसे पहले खुद से सवाल करिए कि आपकी पूरी चिंता आखिर आ कहाँ से रही है ? इसके बाद अपनी चिंता को तीन कैटेगरी में बाटने की कोशिश करिए . देखिये कि आपकी चिंता सिचुएशनल है , एंटीसीपेटरी है या फिर रेसीजुअल है . सिचुएशनल स्ट्रेस एजायटी का एक रुप होता है . ये वर्तमान में घट रहे किसी भी घटनाक्रम के कारण हो सकता है . हो सकता है कि आपका रिलेशनशिप अच्छा ना चल रहा हो , या फिर बिजनेस में कोई दिक्कत आ रही हो . अब बात करते हैं एंटीसीपेटरी स्ट्रेस की ये भी एंग्जायटी का ही एक रुप है . ये तब होता है . जब आप फ्यूचर के बारे में सोच रहे होते हैं . ऐसा हो सकता है कि आपका कोई एजाम होने वाला हो या फिर आपको अपने प्रेजेंटेशन की टेंशन हो . कोई भी ऐसा इवेंट जिसके बारे में सोचकर आपको अभी से दिक्कत हो रही हो .इसके बाद रेसीजुअल स्ट्रेस आता है . इस स्ट्रेस का मतलब होता है कि पास्ट में आपके साथ कुछ बुरा हुआ हो . जिसके कारण आपके दिमाग में ट्रामा का साया पड़ा हो . इसी को पीटीएसडी भी कहते हैं . जिसको पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर कहा जाता है . अब आप तीन पहलु को गौर करिए और पहचानिए कि आपकी कौन सी दिक्कत है ? या फिर आपके दिक्कत की वजह क्या है ? इसी के साथ अगर आप अपने स्ट्रेस को पहचान लेंगे तो आपको इसकी जड़ का भी पता चल जायेगा . इसके बाद कभी भी ये मत सोचियेगा कि आखिर ऐसा आपके साथ ही क्यों हो रहा है ? ऐसा सोचने से आपके पास कोई हल तो नहीं निकलेगा बल्कि आपकी परेशानी और ज्यादा बढ़ जायेगी . इतना जान लीजिये कि अगर आप अपने आपसे दोस्ती कर लेंगे तो आपको कभी भी अपनी दिक्कतों से भागना नहीं पड़ेगा . अपनी दिक्कत को पहचानिए और आगे बढ़ते रहिये . इसी के साथ अगर आप अपनी एंग्जायटी से बाहर आना चाहते हैं . तो सबसे पहले खुद को बेहतर से समझने की कोशिश करिए . अगर आप खुद को समझ लेंगे तो फिर आप इस दिक्कत से बेहतर तरीके से लड़ना सीख पायेंगे . किसी भी दिक्कत को पहचान लेने का मतलब होता है कि आपने उस दिक्कत को आधा सॉल्व कर दिया है . खुद को पहचान लीजिये . खुद की दिक्कत के सोर्स को भी पहचान लीजिये . खुद के दिमाग को हल्का रखने की कोशिश करिए . जिंदगी बहुत बड़ी नहीं होती है . इस छोटी सी जिंदगी में आप खुद के ऊपर ज्यादा बोझ लेकर मत चलिए .अगर आपने अब तक समरी अच्छे से पढ़ी है . तो फिर आपके लिए खुशखबरी है . ये खुशखबरी ये है कि आपने अपनी एंग्जायटी से लड़ने की शुरुआत कर दी है . आपने उसे खत्म करने के लिए पहला कदम भी बढ़ा दिया है . अब दूसरा कदम बढ़ाइए . सबसे पहले अपनी दिक्कतों को सॉर्ट करने की शुरुआत कर दीजिये . सबसे पहले देखिये कि ऐसी कौन – कौन सी दिक्कतें हैं जिन्हें आप आसानी से समाप्त कर सकते हैं ? अगर आपको ऐसी समस्याओं का पता चल जाए तो सबसे पहले उन्हें खत्म करिए . जिन्हें आप खत्म कर सकते हैं तो ठीक हैं . अगर आपको समस्याओं से दूर भी जाना पड़े तो उससे दूर जाने में देर ना करियेगा . जितनी देरी आप करेंगे , उतनी ही देरी आपकी एंग्जायटी को जाने में भी लगेगा . अब पहले ही बहुत ज्यादा देरी हो चुकी है . अब आपके पास और ज्यादा समय बर्बाद करने के लिए नहीं है . सॉर्ट करने के कार्य को आगे बढ़ाते हैं . अब हर एक समस्या को अलग – अलग करके देखने की कोशिश करिए . समस्याओं को देखकर फैसला करिए कि ये कैसी समस्याए हैं ? क्या वो समस्या भूत से जुड़ा हुआ है ? हिस्टोरिकल समस्याएं एंग्जायटी का वो रुप होती हैं . जो इंसान के पास्ट एक्सपीरियंस से डर का रूप ले लेती है . अगर आप कभी रात में टहल रहे हों और टहलते – टहलते आप अँधेरे रास्ते में कुछ सोचते हुए चिंतित हो जाएँ . तो इसका मतलब साफ़ है कि आपको कोई पुरानी बात परेशान कर रही है . जब आपको कोई पुरानी बार परेशान करे तो खुद से कुछ पूछियेगा .खुद से पूछियेगा कि  इस तरह चिंतित होकर आप उस सिचुएशन को बदल सकते हैं ? इसका जवाब होगा कि नहीं , जो चीज़ पास्ट में हो चुकी है . उसे अब बदला नहीं जा सकता है . जिसे आप बदल नहीं सकते हैं . उसके बारे में सोचकर खुद को दिमाग को परेशान करने का क्या ही मतलब है ? एक बार जब आप अपनी परेशानियों को सॉर्ट कर लें तो खुद से पूछिए कि अब क्या करना है ? अगर आपको आपका पास्ट परेशान कर रहा है . तो सबसे अच्छा तरीका है कि कोई इमोशनल हेल्प लीजिये और मूव ऑन करिए . आज का दौर मूव ऑन करने का ही दौर है . आज के समय एक मुख्य वजह होती है डिप्रेशन में जाने कि रिलेशनशिप . आज के दौर के जवान लोग अपने पास्ट के ट्रामा को सोच – सोचकर ट्रामा में रहते हैं . उस ट्रामा की वजह से उनके अंदर एंग्जायटी , स्ट्रेस और डिप्रेशन जैसी बीमारी अपना घर बना लेती है . अगर आपको भी ऐसी कोई दिक्कत है . तो सबसे पहले जान लीजिये कि उसका मुख्य कारण डर है . आपके अंदर किसी ना किसी डर ने अपना घर बना लिया है . उसी डर की वजह से आपको ये दिक्कत हो रही हैं . सबसे पहले तो अपने दिमाग को बताइए कि आपका पास्ट अब जा चूका है . जो भूतकाल है उसे भूत में ही रहने दीजिये .अगर फिर भी वो डर जाने का नाम नहीं ले रहा है तो जवान हो भाई , चौड़ी छाती करो और अपने डर के सामने खड़े हो जाओ . एक बार जब आपका हौसला ऊपर उठेगा ना तो विश्वास मानिए कि आपके डर के लिए कोई जगह नहीं बचेगी . खुद को ये बताते रहिये कि जिंदगी एक सफर का नाम है . इस सफर में कई सारे लोग मिलेंगे , कई सारे रिश्ते टूटेंगे . इस दुनिया में कुछ भी परमानेंट नहीं है . आपका दुःख भी परमानेंट नहीं है . हर दुःख के पीछे ही सुख का रास्ता भी खुला रहता है . देर है तो बस इस बात की , कि आप उस रास्ते को पहचान ही नहीं पा रहे हैं . कई बार एक लॉन्ग वेकेशन और अध्यात्म का रास्ता भी इंसान के दिमाग को शांत करने में मदद करता है . अगर आपको इस तरह की मदद की भी ज़रूरत पड़े तो आपको उसको लेने के लिए आगे बढ़ना चाहिए . कोशिश करते रहिये कि अपने आपको व्यस्त रख सकें . अगर आप व्यस्त रहेंगे तो आपके दिमाग में इतनी जगह ही नहीं बचेगी कि फ़ालतू की सोच उसकी जगह ले सके . इसके साथ ही आपको खुद को चैलेन्ज करते रहना चाहिए . आपको अपनी फीलिंग्स को भी चैलेन्ज करना चाहिए . खुद से पूछना चाहिए कि कितनी बार ऐसा हुआ है कि आप जो सोचे वो सच हो जाए ? ऐसे सवाल आपकी मदद करेंगे . इतनी मदद आपके लिए काफी हो सकती है .इन सबसे ऊपर आपको ये बात याद रखनी चाहिए कि आपकी मदद आपके अलावा कोई और नहीं कर सकता है . अगर आपको खुद की मदद करनी है . तो फिर आपको अपनी दिक्कतों का सामना करना भी सीखना पड़ेगा . अपनी हिम्मत को इतनी विराट रखिये कि सभी समस्याएं उसके सामने बौनी साबित हों .

फोकस को तेज करिए , सही का चुनाव करिए

अगर आप ऐसा सोचते हों कि चीजें आपकी कंट्रोल में नहीं हैं . तो इंतज़ार करते रहिये . लाइफ में बहुत जल्द आपको बड़ा सरप्राइज मिलने वाला है . जिंदगी ऐसे समय में सरप्राइज से रुबरु करवाती है . जब आपको उसकी दूर – दूर तक उम्मीद नहीं होती है . इसलिए हमेशा तैयार रहिये कि आपके सामने कुछ मस्त सरप्राइज आने वाला है . इसका ये मतलब बिल्कुल भी नहीं है कि जिंदगी में सबकुछ आपके हांथों में ही है . कई चीजें होती हैं ऐसी जिनका हम कुछ नहीं कर सकते हैं . उन चीज़ों और बातों को जल्द से जल्द एक्सेप्ट करने की आदत डाल लीजिये . जितनी जल्दी आप चीज़ों को एक्सेप्ट कर सकते हैं . उतनी जल्दी करिए . अगर आप एक्सेप्ट नहीं करेंगे तो फिर आप परेशान होते रहेंगे . अगर आपको परेशान नहीं होना है तो लाइफ को हल्का – फुल्का बनाने की कोशिश करिए . जितना लाइफ को आप हल्का बनायेंगे उतना ही दिमाग भी आपका हल्का फुल्का ही रहेगा.जब दिमाग हल्का रहेगा . तब आपके पास कोई परेशानी ही नहीं रहेगी . जब ज़िन्दगी में परेशानी नहीं होगी तो एंग्जायटी का सवाल ही पैदा नहीं होता है . भूल जाइए , एंग्जायटी क्या होता है ?

लाइफ का एक सच ये भी है कि हम कुछ परेशानियों को तो पहचानकर उन्हें दूर कर सकते हैं . लेकिन कई दिक्कतें ऐसी होती हैं . जिन्हें हम खुद से दूर नहीं कर सकते हैं . अब सवाल ये उठता है कि हम उन परेशानियों से खुद को कैसे बचाएं ? इसके लिए एक आसान रास्ता ये भी बताया गया है कि हमें तब कुछ समय सिर्फ और सिर्फ समय को देना ही चाहिए . अगर हम टाइम को टाइम देते हैं तो फिर एक समय आएगा जब सब कुछ सही – सही लगने लगेगा . लेकिन लोगों के अंदर पेशन्स की कमी आ जाती है . जब पेशन्स की कमी आती है तो चीजें बिगड़ने लगती हैं . अब ये हमारे ऊपर ही है कि हम उस सिचुएशन को कैसे हैंडल करते हैं ?

कई साइकोलोजिकल स्टडी में ऐसा कहा गया है . कि डिप्रेशन का मेन रीजन या फिर यूँ कहें कि सबसे बड़ा रीजन ओवर थिंकिंग ही है . ओवर थिंकिंग दिमाग की वो अवस्था होती है . जब वो कुछ ज्यादा ही सोचने लगता है . कई बार तो दिमाग ऐसे साइकिल में सोचता है कि चीजें आउट ऑफ़ कंट्रोल हो जाती हैं . इसलिए इंसान को इस डिप्रेशन के बारे में जानने से पहले ओवर थिंकिंग के बारे में भी जानना चाहिए . इन सबके साथ एक सच ये भी है कि कोई भी सोच तभी तक आपको परेशान कर सकती है.जब तक आप उस सोच को अपने आपको परेशान करने देते हैं .

सोचने की शक्ति को समझिये , इससे प्रॉब्लम सॉल्व भी हो सकती है और बढ़ भी सकती है .

क्या आपको पता है कि एजायटी का ईलाज कैसे किया जाता है ? क्या सिर्फ और सिर्फ एंग्जायटी का ईलाज दवाई से ही होता है ? इसका जवाब है . नहीं , इस एंग्जायटी का ईलाज इमेजिनेशन से भी हो सकता है .

जी हाँ , आपने सही सुना है . एंग्जायटी को खत्म आप अपने इमेजिनेशन के पॉवर से भी कर सकते हैं .

अब ये आपके ऊपर है कि आप अपनी इमेजिनेशन का यूज कैसे करते है ?

इमेजिनेशन एक पावरफुल टूल है . इस टूल की मदद से आप खुद को शांत भी रख सकते हैं .

स्ट्रेस को लेकर अगर बात की जाए तो ये चीज़ बस इंसान को ही होती है . क्योंकि इंसान का दिमागी स्ट्रक्चर ही अलग बना हुआ है .

इमेजिनेशन का ही अगर सही इस्तेमाल ना किया जाये तो वो ओवर थिंकिंग बनती है . ओवर थिंकिंग से ही एंजायटी और स्ट्रेस का जन्म होता है . वहीं अगर इसी थिंकिंग का प्रोडक्टिव यूज किया जाए तो ये आपको एंग्जायटी और स्ट्रेस से बाहर लेकर भी आएगी . इसलिए हमेशा अपनी सोच सही डायरेक्शन में लगाने की कोशिश करनी चाहिए . जितनी सही आपको सोच होगी , उतनी ही बेहतर आपकी जिंदगी होगी . इस दुनिया में बड़े – बड़े आविष्कार भी  इमेजिनेशन की वजह से ही हुए हैं . अब आप सोच सकते हैं कि इमेजिनेशन का क्या पॉवर है ? इस पॉवर को अपने लिए इस्तेमाल करिए , जब आप इमेजिनेशन का सही इस्तेमाल सीख जायेंगे . तो खुद ओब्सर्व करने लगेंगे कि प्रॉब्लम धीरे – धीरे खत्म होती जा रही है .

किसी भी समस्या को खत्म करने के लिए उसकी जड़ में अपनी पकड़ मज़बूत बनाने की कोशिश करिए .

दूसरों की मदद लेने से मत डरिये और जीतने का हौसला रखिये

क्या आपने कभी सोचा है कि क्या दुनिया का कोई भी युद्ध बिना लोगों की मदद से जीते जा सकते थे ? क्या सिकंदर कभी सिकंदर बन पाता अगर उसे दूसरे लोगों की मदद ना मिलती ? क्या विश्व में कभी भी अन्य लोगों की मदद से कोई भी आविष्कार हो पाता ? इसके पीछे जवाब है . नहीं . इसलिए अगर आप किसी दिक्कत में हैं तो सही इंसान की तलाश करके उससे मदद लेने की कोशिश करिए . लेकिन ध्यान रखियेगा कि मदद आपको सही इंसान से मांगनी है . अगर लोहार के पास सोना बनवाने ले जायेंगे तो कभी भी आपका काम नहीं हो पायेगा . इसलिए अपनी नजर को पारखी बनाइए . अगर परेशानी आपके पास है तो फिर ईलाज भी आपके पास ही होगा . देर है तो बस आपकी पारखी नजर की , जल्द से जल्द अपने डॉक्टर की तलाश कर लीजिये . अपने आस – पास के हर इंसान को खुश करना बंद कर दीजिये . अगर जिंदगी में आपको खुश रहना है . तो फिर ये बात जान लीजिये कि सबको खुश नहीं रखा जा सकता है . ऐसा कई बार होगा कि लोग आपसे नाराज़ होंगे . कई रिश्ते भी आपसे पीछे छूट जायेंगे . लेकिन उस समय आपको घबराना नहीं है बल्कि जिंदगी के खेल को खेलते जाना है . अपने दिमाग को इस बात का एहसास दिला दीजिये कि जो आपकी जिंदगी में रहना चाहता है उसका स्वागत है और जो जाना चाहता है उसको इजाज़त है .

कभी भी किसी से भी रिश्ते या फिर प्यार की भीख मत मांगिएगा . भीख में मांगी गयी ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं होता है . ऐसी ख़ुशी का क्या ही मतलब जिसे भीख मांगकर अपने पास लेकर आया जाए . इसलिए खुद को हर परेशानी के लिए तैयार रखिये . शेर हैं आप और शेर की ही तरह जीना है आपको

कुल मिलाकर

चिंता , स्ट्रेस और एंग्जायटी एक साइकिल का हिस्सा है . इस साइकिल से आपका जीवन खराब होता है . लेकिन अगर आपको इसको कंट्रोल करना आ गया तो आप इसे अपने यूज के हिसाब से उपयोग भी कर सकते हैं . इस किताब के माध्यम से लेखक यही बताना चाहते हैं कि जिंदगी में ऐसा कुछ भारी है ही नहीं , जितना हम अपने दिमाग को बोझ देते हैं . अगर हम चाह लें तो अपनी लाइफ को बड़ी ही आसानी से जी सकते हैं . इसे कठिन बनाने की कोई ज़रुरत नहीं है . खुश रहिये , आज़ाद रहिये .

क्या करें ?

कसरत करिए , जिम में जाइए , दौड़ने जाइए . अपनी एंग्जायटी को रोज़ नए – नए तरीके से चैलेन्ज करते रहिये.जीतने के लिए जीत वाला हौसला लेकर आइये.जीत आपकी ही होगी इस बात का एहसास खुद को हमेशा दिलाते रहिये

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