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Bisleri बिसलेरी (Bottled drinking वाटर) ब्रांड के सफलता की कहानी

Stone temples at Jageshwar, Almora
Photo creditUttarakhand collection · context photograph · PradeepBisht · CC BY-SA 4.0 · Resized, WebP conversion and display crop. Same license as original.

secureutt · 2022-11-25

देश की सबसे लोकप्रिय और भरोसेमंद बोतलबंद पानी (Bottled Water) बनाने वाली कंपनी Bisleri बिकने जा रहा है। टाटा समूह (Tata Group) इस कंपनी को 7,000 करोड़ रुपए में खरीदने जा रहा है। टाटा के अलावा, नेस्ले, रिलाइंस आदि भी इसे ख़रीदना चाहती थी। लेकिन Bisleri के मालिक रमेश चौहान ने टाटा पर अपना भरोसा जताया। रमेश चौहान (Ramesh Chauhan) इस समय 83 वर्ष के हैं। रमेश चौहान ने बताया कि उनके पास कोई उत्तराधिकारी नहीं है, जो इस कंपनी को आगे ले जाये। उनकी एकमात्र पुत्री जयंती को इस कारोबार में दिलचस्पी नहीं है।  बिसलेरी (Bisleri) देश का सबसे भरोसेमंद बोतल बंद पानी का ब्रांड कैसे बना? 

बिसलेरी (Bisleri) की शुरुआत।

बिसलेरी की स्थापना इटली के Signor Felice Bisleri ने की थी। सन 1965 में इटली के नोसेरा उम्ब्रा में उनके नाम से पर बना ब्रांडेड पानी बेचने का फार्मूला भी भारत में Felice Bisleri ही लाए थे। Signor Felice Bisleri एक व्यापारी, आविष्कारक और केमिस्ट थे। और बिसलेरी के मालिक थे डॉक्टर रोजिज। शुरुआत में यह एक मलेरिया के इलाज के लिए दवा बनाने वाली कंपनी थी। उसी दवा को बेचने के लिए इस कंपनी की मुंबई में भी एक शाखा थी। भारत के खुसरू संतुक के पिता बिसलेरी कंपनी के भारत के एक लीगल एडवाइजर होने के साथ बिसलेरी परिवार के डॉक्टर रोजिज के काफी अच्छे दोस्त भी थे। भारत में हो रही व्यापार वृद्धि को देखते हुए बिसलेरी के मालिक डॉक्टर रोजिज कुछ अलग करना चाहते थे। तब मुंबई में मिलने वाले पानी की क्वालिटी काफी खराब होने की रिपोर्ट आने लगी थी। तब डॉक्टर रोजिज ने बिसलेरी कॉन्सेप्ट वाला बिजनेस भारत में मुंबई से शुरू किया। डॉक्टर रोजिज ने खुसरू संतुक के साथ 1965 में मुंबई के ठाणे में बिसलेरी का पहला वाटर प्लांट स्थापित किया। बिसलेरी ने शुरुआत में मार्केट में दो प्रॉडक्टों के मार्केट में उतरा। आया बोतल बंद पानी और दूसरा सोडा।  बिसलेरी के ये दोनों प्रोडक्ट्स पहले बड़े होटल्स और रेस्टोरेंट में मिलते थे। धीरे धीरे रिटेल मार्केट में इनकी माँग होने लगी। पहले बिसलेरी के सोडे की माँग ज़्यादा थी। पानी के लिए उस समय आम लोग सोचते थे कि  - मुफ़्त उपलब्ध होने वाली चीज को कौन ख़रीदेगा। इसलिए बिसलेरी को अधिक सफलता नहीं हासिल हो रही थी। इस वजह से खुसरू संतुक अपने इन ब्रांड्स को आगे चलाना नहीं चाहते थे।

Bisleri को पार्ले ने खरीदा

बिसलेरी वाटर को मिली असफलता के बाद खुसरू संतुक ने अपनी इस कंपनी को बेच दिया। जिसे पार्ले कंपनी के  रमेश चौहान ने 1969 में बिसलेरी (इंडिया) लिमिटेड के रूप में 4 लाख में ख़रीद लिया। बिसलेरी को रमेश चौहान ने सोडा बेचने का कारोबार ख़रीदने के उद्देश्य से ख़रीदा। तब बिसलेरी के देशभर में मात्र 5 स्टोर थे, 4 मुंबई में और एक कोलकाता में। रमेश चौहान ने बिसलेरी के बोतलबंद पानी वाले दो ब्रांड ‘बबली’ और ‘स्टिल’ के साथ साथ बिसलेरी सोडा भी लॉन्च किया। पारले समूह ने कई सालों तक सोडा और पानी दोनों बिसलेरी ब्रांड के नाम से बेचा।उस वक्त सॉफ्ट ड्रिंक कांच की बोतल में बिकते थे, जिन्हें पीने के बाद वापस करना होता था। पार्ले कंपनी ने मार्केट रिसर्च कर जाना कि भारत के सार्वजानिक स्थल, रेलवे स्टेशन और अन्य जगहों पर पानी की शुद्धता नहीं होने के कारण लोग प्लेन सोडा खरीद कर पीते हैं। तब पार्ले कंपनी पार्ले ने डिस्ट्रीब्यूटर्स की संख्या बढाई और ऐसी जगहों पर बिसलेरी स्वच्छ जल की आपूर्ति की, जहां साफ़ पानी उपलब्ध और समय के साथ यह कॉन्सेप्ट चल पड़ा, साथ में ब्रांड के प्रमोशन, ब्रांड की पेकिंग और पानी की अशुद्धि से होने वाले रोगों की जानकारी बढ़ने के साथ बाज़ार में बिसलेरी का बोतल बंद पानी तेज़ी से बिकने लगा। 1985 के दौरान PET यानी प्लास्टिक मटेरियल आने के बाद तो इस बिज़नेस में क्रांतिकारी परिवर्तन आ गया। यह हलका, मजबूत और रीसाइकल किया जा सकने वाला ऐसा पैकेजिंग मटीरियल था, जिसे किसी भी आकार में ढाला जा सकता था। इससे पैकेजिंग की समस्या हल हुई और दाम भी कम हुए और आसानी से सप्लाई होने लगी। वहीँ अंत में पीईटी कंटेनरों में उन्नत किया गया।

2000 के दशक के बाद और भी ब्रांड मार्केट में आने लगे। 

बिसलेरी की सफलता से प्रेरित होकर साल 2000 में बेली (Bailley), एक्वाफीना (Aquafina) और किनले (Kinley) जैसी कंपनियों ने भी शुद्ध पानी के दावे के साथ इस बाजार में कूदे और बिसलेरी (Bisleri) के एकाधिकार में सेंध लगाई। दूसरे ब्रांडों से मिल रही टक्कर को देखते हुए बिसलेरी ने विभिन्न साइज के आकर्षक पैकेज बाजार में पेश किए.। और अपने इस ब्रांड के विज्ञापन में भी बदलाव किया। ब्रांड्स में प्रतियोगिता और लोगों में जागरूकता बढ़ने के साथ लोगों में बोतल बंद पानी के लिये माँग तेज़ी से बड़ी। इस मार्केट में सबसे पहले एंट्री बिसलेरी और मजबूत होती गई। 2003 में बिसलेरी ने यूरोप में भी उपस्थिति दर्ज की।

आज बिसलेरी

आज बिसलेरी की भारत में बोतलबंद पेयजल में 60% बाजार हिस्सेदारी है। 135 प्लांट्स में दो करोड़ लीटर से भी अधिक पानी रोज बेचने वाली बिसलेरी देश-दुनिया में छाई है। बिसलेरी 5000 से ज्यादा डिस्ट्रीब्यूटर्स ट्रकों और 3500 डिस्ट्रीब्यूटर्स के जरिए साढ़े तीन लाख रिटेल ऑउटलेट्स तक पहुंच रहा है।

Bisleri का रेवेन्यू

पिछले वित्तीय वर्ष में बिसलेरी का रेवेन्य 2500 करोड़ से भी अधिक हैं, और लाभ लगभग 220 करोड़।

Bisleri के चेयरमैन

सॉफ्ट ड्रिंक और मिनरल वाटर उद्योग में सक्रिय वर्षीय रमेश चौहान बिसलेरी इंटरनेशनल के अभी तक चेयरमैन हैं, उनकी इकलौती संतान का नाम जयंती चौहान है।

रमेश चौहान के बारे में

जयंतीलाल चौहान के तीन बेटों में से एक हैं रमेश चौहान। उनके दो भाई है -  मधुकर और प्रकाश चौहान। रमेश चौहान ने अमेरिका के मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग व बिजनेस मैनेजमेंट की पढ़ाई की हैं। पिता के इस कारोबार से जुड़ते ही रमेश चौहान ने निर्णय लिया कि उन्हें सॉफ्ट ड्रिंक में ज्यादा वेरायटी के साथ सोडा भी लॉन्च करना चाहिए।
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