डॉक्टर्स ने जब कहाँ कि कुछ ही दिन जीवित रह सकता हूँ, कैसे फिर से अच्छा जीवन जिया?

वर्ष 1920 अपने व्यवसाय में बुरी तरह नुक़सान होने के बाद, मैं इतना चिंतित रहने लगा था, कि मेरे आमाशय की परत में अल्सर Gastric Ulcer के लक्षण आने लगे। एक रात मुझे बहुत तेज ब्लीडिंग होने लगी, मुझे तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। मेरा वजन 90 किलो से घट कर 41 किलो हो गया। मैं इतना बीमार था कि, मुझे हाथ भी न उठाने की चेतावनी दी गई थी। एक जानेमाने अल्सर विशेषज्ञ सहित तीन डॉक्टरों ने कहा कि, मेरी बीमारी ‘लाइलाज ‘है। मैं दवाओं के दम पर जिंदा रहा और हर घंटे दिए जाने वाले एक चम्मच आधे दूध और आधी क्रीम पर। हर रात और हर सुबह एक नर्स मेरे आमाशय में रबर की एक नली डालती थी और पेट की सफ़ाई होती थी।’ “यही सिलसिला महीनों तक चलता रहा….

आखिर मैंने खुद से कहा- “देखो, अगर तुम भविष्य में घिसटती हुई मौत के अलावा कुछ नहीं देख सकते, तो तुम्हारे पास जो थोड़ा-सा समय बचा है, क्यों न उसका अधिकतम आनंद उठाया जाए। तुम्हारी हसरत थी कि मरने से पहले दुनिया की सैर करोगे, इसलिए अगर तुम्हें यह सैर करनी है, तो इसे अभी करना होगा।

मैंने डॉक्टरों को बताया कि – मैं दुनिया की सैर करने जा रहा हूँ, और दिन में दो बार खुद ही अपने पेट की सफ़ाई करूँगा – तो वे चौंक गए… असंभव। उन्होंने इस तरह की बेवक़ूफ़ी कभी नहीं सुनी थी। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर मैं गया तो, जिस समुद्री मार्ग से दुनिया की सैर करने जा रहा हूँ उसी समुद्र की गहराई में शीघ्र ही दफन हो जाऊँगा। मैंने जवाब दिया – नहीं, ऐसा नहीं होगा। मैंने अपने रिश्तेदारों से वायदा किया कि, मैं अपने शहर के पारिवारिक कब्रिस्तान दफनाया जाऊंगा। इसलिए अपना ताबूत अपने साथ ले जा रहा हूं।

मैंने एक ताबूत का इंतजाम किया, इसे जहाज पर रखवाया और फिर स्टीमशिप कंपनी के साथ इस तरह की व्यवस्था की कि मेरी मौत की स्थिति में वे लोग मेरी लाश को बर्फ के कम्पार्टमेंट में रख देंगे और तब तक वही रखेंगे, जब तक कि जहाज घर वापस नहीं लौट आता। मेर सफर शुरू हो गया – हमारे सामने जो भी है, उसमें पूरा आनंद लो।

जिस पल मैं पूर्वी देशों की ओर जा रहे जहाज पर सवार हुआ, मैं बेहतर महसूस करने लगा। धीरे- धीरे मैंने दवाएं लेना और आमाशय पंप लेना बंद कर दिया, मुझे उनकी ज़रूरत नहीं लग रही थी। मैं जल्दी ही सब तरह के भोजन लेने लगा था। यहां तक कि अजीब से स्थानीय पकवान जो मैंने कभी चखे नहीं थे, और कई तरह पेय पदार्थ भी, जो मेरी निश्चित मौत की समय सीमा, के कई सप्ताह गुजर जाने के बाद मैं लंबे काले सिगार भी पीने लगा। मैंने अपने जीवन में उन दिनों इतना आनंद लिया।

हम मानसून और तूफानों से भी टकराए, मैं अब तक ताबूत में पहुंचा दिया गया होता अगर मैं डरा होता। परंतु मुझे इस सारे रोमांच में बड़ा मजा आ रहा था।

मैंने जहाज पर खेल खेले गीत गाए, नए दोस्त बनाए और आधी रात तक जागा। जब हम चीन और भारत पहुंचे तो मैंने महसूस किया कि जिन बिजनेस समस्याओं से मैं अतीत में जूझ रहा था, वे पूर्वी देशों की गरीबी और भूख से तुलना करने पर तो स्वर्ग की तरह हैं। मैंने मूर्खतापूर्ण चिंता की आदत समाप्त कर दी और मुझे अच्छा लगने लगा। अमेरिका लौटने पर तो मेरा वजन 41 किलो बढ़ बढ़ चुका था और में लगभग भूल चुका था कि मेरे आमाशय में कभी अल्सर भी थे। मैंने अपनी जिंदगी में कभी इतना स्वस्थ अनुभव नहीं किया था। मैं दुबारा अपने बिजनेस के कार्य करने लगा और तब से एक दिन भी बीमार नहीं रहा।

यह कहानी अमेरिका के एक व्यवसायी अर्ल पी. हैनी Earl P Haney  की है। जो Dell Karnegi की पुस्तक नर्वस स्टमक ट्रबल Nervous Stomach Trouble पुस्तक के लेखक डॉ. जोसेफ एफ. मॉन्टेग्यू Joseph F. Montague भी इसी तरह की बात कहते हैं-

‘आप क्या खाते हैं, उससे आमाशय का अल्सर नहीं होता। अल्सर तो आपको उस चीज से होता है, जो आपको खाए जा रही है।”

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