पुराने संग्रह से
उत्तराखंड के प्रमुख लोकगीत

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Uttarakhand collection · context photograph · PradeepBisht · CC BY-SA 4.0 · Resized, WebP conversion and display crop. Same license as original.neha · 2022-11-12
उत्तराखंड के पहाड़, नदियां, झीलें, झरने, पर्यटन स्थल जितने लोकप्रिय हैं, यहाँ की संस्कृति भी यहाँ का एक बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। संस्कृति से परिपूर्ण उत्तराखंड में कई तरह के लोकगीत भी हैं जिन्हें अलग-अलग अवसरों में लोगों द्वारा गया जाता हैं।
झुमैलो गीत:
गढ़वाल क्षेत्र में गाये जाने वाले झुमैलो गीत वेदना और प्रेम के प्रतीक हैं। इन गीतों में नारी हृदय की वेदना के साथ ही उसके रूप सौन्दर्य का वर्णन भी मिलता है। ये गीत बसन्त पंचमी से विषुवत संक्रांति तक गाये जाते हैं।बसंती गीत:
गढ़वाल क्षेत्र में बसन्त के आगमन पर किशोरियां फंयूली के फूलों को एकत्रित कर प्रातः घर-घर जाकर देहली पूजा करती हैं और बसन्त पंचमी के दिन देहलियों और द्वारों पर चावलों के पीठे से चित्र बनाकर गोबर से हरे जौ की गुच्छियां थाप कर लगायी जाती हैं। इस पूरे कार्यक्रम के दौरान बासन्ती गीत गाये जाते है।होरी गीत:
बसन्त के ही मौसम में यह गीत होली के दिन गाया जाता है। लोग शंख, ढोलक और दमाऊ बजाते हुए गांव-गांव जाते हैं और होरी गीत गाते हैं।बाजूबन्द नृत्य गीत:
रवांई-जीनपुर क्षेत्र में गाया जाने वाला यह एक प्रणय संबाद नृत्य गीत हैं। इसे जंगल में बांज, बुरांश,काफल, चीड़ और देवदार के पेड़ों के नीचे बैठकर गाते हैं। इसे दूड़ा नृत्य गीत भी कहते हैं।खुदेड़ गीत:
पहले गढ़वाल में लड़कियों का विवाह बचपन में ही हो जाता था। ससुराल में उन्हें घर के सारे कार्य करने पड़ते थे। अतः वे मायके की याद में खुदेड़ गीत गाती थी।चौफला गीत:
यह स्त्री-पुरूष द्वारा सामूहिक रूप से गाया जाने वाला एक प्रकार का प्रेम व मिलन गीत है, इसमें रति, हास, मनुहार व अनुनय चारो भाव समाहित होते हैं। यह नृत्य प्रधान गीत है।कुलाचार या विरूदावली गीत:
ये गीत राज्य में औजी व बद्दी जाति के लोगों द्वारा अपने ब्राह्मण-क्षत्रिय यजमान के घर मांगलिक अवसरों पर जाकर गाए जाते हैं। इन गीतों में औजी तथा बद्दी लोग अपने यजमान और उनकी जाति-वंश का गुणगान करते हैं।चैती पसारा गीत:
चैत के महीने में औजी और वही जाति के लोग अपने स्त्रियों के साथ अपने यजमान के यहाँ विभिन्न प्रकार के गीत गाते हैं और उनकी स्त्रियां नृत्य करती हैं। बदले में वे रूपये, अन्न आदि प्राप्त करते हैं।चौमासा गीत:
ये गीत वर्षा ऋतु में गाये जाते है, जिसमें अधिक वर्षा एवं प्रिय मिलन की आस रहती है। इन गीतों में विरह की भावना दृष्टिगोचर होती है।बारामासा:
गढ़वाल क्षेत्र में विरहणी स्त्रियों द्वारा गाये जाने वाले बारामासा गीत में बारहों महिनों के लक्षणों (कैसा मौसम, कौन-कौन फूल, कैसा प्राकृतिक सौन्दर्य आदि) का वर्णन होता है।
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