'पहाड़ी पालक' हेतु उत्तराखंड की पहाड़ियों की ठंडी जलवायु काफी बेहतर मानी जाती है। पहाड़ी पालक के कंटीले बीज होते हैं। पत्तियाँ मैदानी पालक की तुलना में कम चौड़ी होती हैं।

पालक में बड़ी मात्रा में आयरन होता है और अगर इसे ठीक तरीके से लिया जाए तो हीमोग्लोबिन एवं लाल रक्त कणों में वृद्धि करता है। इस प्रकार यह खून की कमी में बहुत फायदेमंद है।

पालक कैल्सियम का भी अच्छा स्रोत है। इसके अतिरिक्त अन्य क्षारीय तत्व भी इसमें काफी मात्रा में होते हैं, जो ऊतकों के लिए बहुत जरूरी हैं।

सामान्य फायदे व उपयोग: बाल गिरना– बाल झड़ने की बीमारी में कच्चे पालक का सेवन करना चाहिए, इससे बालों का झड़ना बन्द हो जाता है। कम रक्तचाप के रोगियों को रोजाना पालक की सब्जी का सेवन करना चाहिए। माना जाता है कि यह रक्त प्रवाह को नियंत्रित करने में मदद करता है।

थायरॉइड में एक कप पालक के रस के साथ एक चम्मच शहद और चौथाई चम्मच जीरे का चूर्ण मिलाकर सेवन करने से लाभ होता है। पालक के रस से कुल्ला करने से दांतों की समस्याओं, मुंह की बदबू जैसे विकार दूर हो जाते हैं।

दिल की बीमारियों से ग्रस्त रोगियों को रोजाना एक कप पालक के जूस में 2 चम्मच शहद मिलाकर लेना चाहिए। खून की कमी दूर करने के लिए आधे गिलास पालक के रस में दो चम्मच शहद मिलाकर 50 दिनों तक पियें इससे खून की कमी अवश्य दूर होगी। स्त्रियों को गर्भावस्था में पालक का सेवन जरुर करना चाहिए ।

पालक के रस का निरन्तर सेवन करने से चेहरे के रंग में निखार आ जाता है। रक्त बढ़ता है। इसका रस, कच्चे पत्ते या छिलके सहित मूंग की दाल में पालक की पत्तियाँ डालकर सब्जी खानी चाहिए।

ताजे पालक के रस को रोज पीने से याददाश्त बढ़ती है। इसमें आयोडीन होने की वजह से यह दिमागी थकान से छुटकारा दिलाता है। पीलिया के दौरान रोगी को पालक और कच्चे पपीते का रस मिलाकर देना चाहिए।

पालक के रस को आधा-आधा कप रोजाना तीन चार बार पीने से दस्त बन्द हो जाते हैं और शरीर में ताकत भी बढती है।

जिन लोगो को पेशाब कम आने या रुकावट की समस्या हो तो हरे नारियल के पानी में पालक के रस को समान मात्रा में मिलाकर रोजाना दो बार पीने से पेशाब खुलकर आता है।