यादों के पृष्ठ

आँगन बचपन वाले अब कहाँ!

बचपन!  क्या दिन हुआ करते थे वो भी। सुबह-सुबह  बिस्तर से उठकर घर की देहरी में बैठकर, मिचमिचाई आँखों को मलते हुऐ, मैं, आँगन...

अंधेरी रात के चमकीले भूत का सच

दोस्तों मैं आज आपको कहानी बताने जा रही हूं, अंधेरी रात के चमकीले भूत की। इस कहानी में पांच-छह साल के बच्चों का ग्रुप...

वास्तविक अनुभव : कल क्या होगा कौन जान सकता है!

साल 2005 मैं एक कंपनी का झारखंड और बिहार का सेल्स देखता था। कंपनी की ऑफिस रांची और पटना दोनों जगह था। मेरा घर रांची...

बस में वो अकेली लड़की (कविता)

बस की किनारे वाली सीट की खिड़की से, बाहर झांकती वो लड़की। पीछे छुटते पहाड़ों, नदी और नदी के पार, उंचाई पर पर बसे...

दांत का दर्द और डॉक्टर

जनाब जिंदगी मे हमारे अफ़साने बनना तो तय था लेकिन कभी सोचा नही था के हमारे दांतों के भी इतने अफ़साने बन जायेगे कि...

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