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उत्तराखंड के रोचक तथ्य

उत्तराखंड के बारे में तो आप सभी ने सुना होगा  उत्तराखंड एक उत्तरी भारतीय राज्य है जिसे पूर्व में उत्तरांचल कहा जाता था। उत्तराखंड को देव भूमि के रूप में जाना जाता है, कई हिंदू मंदिरों और तीर्थयात्रा केंद्रों के कारण उत्तराखंड एक विशेष पर्यटक स्थल है । उत्तराखंड हिमालय की प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है, उत्तराखंड की सीमा हिमाचल प्रदेश के साथ उत्तर पश्चिम में और दक्षिण में उत्तर प्रदेश में सीमाएं हैं। उत्तराखण्ड राज्य को गढ़वाल और कुमाऊं नाम से दो विभागों में विभाजित किया गया है। इसका उच्च न्यायालय नैनीताल में है। यह वह राज्य है जहां दो सबसे महत्वपूर्ण नदियां उत्पन्न होती हैं, अर्थात्, गंगोत्री में गंगा और यमुनोत्री में यमुना। इस राज्य में सबसे पुराना राष्ट्रीय उद्यान है जिसका नाम जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क है3।उत्तराखंड के कुछ रोचक तथ्य आप इस पोस्ट में आगे पद सकते है

  1. विरल आबादी, लेकिन अधिकांश आदमी सेना में उत्तराखंड में कुल आबादी कोलकाता शहर से भी कम है भारतीय सेना में उत्तराखंड की सर्वोच्च भागीदारी है और किसी भी अन्य भारतीय राज्य की तुलना में सेना में उत्तराखंड के अधिक से अधिक लोग हैं।
  2.  उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित रूपकुंड एक उच्च ऊचाई वाली हिमनदी झील है । झील के किनारे सैकड़ों मानव कंकालों के लिए रूपकुंड प्रसिद्ध है इसी कारण इसे एक रहस्यमयी झील के रूप में जाना जाता है, रूपकुंड झील लगभग दो मीटर गहरी है, हर साल सैकड़ों ट्रेकर्स और तीर्थयात्री यहाँ सैर करने आते है
    विशेषज्ञों द्वारा यह माना जाता था कि उन लोगों की मौत महामारी भूस्खलन या बर्फानी तूफान से हुई थी
  3. विश्व में तुंगनाथ सबसे बड़ा भगवान शिव मंदिर है। तुंगनाथ का शाब्दिक अर्थ है (पहाड़ियों का भगवान) पहाड़ों में अलकनंदा और मंदाकिनी नदी घाटियां बनती है । यह मंदिर 1000 वर्ष पुराना माना जाता है। यह पांडवों और महाभारत के सेनानियों महाकाव्य से जुड़ा हुआ है
  4. योग का मूल एक बहुत बहस वाला विषय है, लेकिन कई इतिहासकारों का कहना है कि यह ऋषिकेश के गंगा बैंकों के साथ ही हिमालय के आसपास हो सकता है। यह एक पवित्र स्थान का प्रतीक रहा है, दुनिया के विभिन्न कोनों से आध्यात्मिक लोगों को आकर्षित करने, जमीन, दर्शन और आत्मा से जुड़ने की कोशिश कर रहा है। बीटल्स ने 1968 में अपनी उपस्थिति के साथ उत्तराखंड की भूमिका निभाई थी और द बीटल्स, द व्हाइट एल्बम को ज्यादातर यहां लिखा गया था। उमा थुरमैन को जेरेमी पीवेंट, और कई बॉलीवुड सितारों, प्रिंस चार्ल्स और डचेस ऑफ9 कॉर्नवाल ने इस शहर का दौरा किया है। महर्षि महेश योगी वहां बीटले’सगुरु थे- और उनके प्रसिद्धि का दावा ट्रान्सेंडैंटल मेडिटेशन तकनीक का परिचय
  5.  उत्तराखंड एकमात्र भारतीय राज्य है जिसकी  संस्कृत अपनी आधिकारिक भाषाओं में से एक है।
  6. नंदा देवी, उत्तराखंड में सबसे ऊंचा पहाड़ 7,816 मीटर की ऊंचाई पर है, भारत का दूसरा सबसे ऊंचा पर्वत है । नंदा देवी पर्वत विश्व का सबसे ऊंचा पर्वत माना जाता था , जब तक धौलागिरी पर्वत को नही मापा गया था, ये नंदा देवी नेशनल पार्क से घिरा है  जहां दुर्लभ फूलों और पौधों सहित लुप्तप्राय जानवरों की उपस्थिति है मवेशी हिरण, भूरा भालू, लाल लोमड़ी, एशियाई काली भालू, हिम तेंदुए और नीली भेड़ । नंददेवी अभयारण्य- 1983 में स्थानीय और पर्वतारोही दोनों के लिए बंद हुआ करता था 
  7. फूलों की घाटी 1931 में तीन ब्रिटिश पर्वतारोही फ्रैंक एस स्मिथ, एरिक शिपन और आर.एल. होल्डरवर्थ द्वारा खोजी गयी थी , जब वे काममेट माउंट से वापस लौट रहे थे । 1982 में फूलो की घटी को  राष्ट्रीय उद्यान धोषित किया गया, फूलो की घाटी की भारी लोकप्रियता के परिणामस्वरूप  1988 में  विशेष सांस्कृतिक या भौतिक महत्व के लिए साइट को यूनेस्को का विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया।
  8. देवी नंदा देवी (परमात्मा की देवी) उत्तराखंड में सबसे प्रतिष्ठित देवी  है और गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्र दोनों में इनकी पूजा की जाती है। तीर्थयात्रा प्रत्येक 12 वर्षों में एक बार होती है और बड़ी संख्या में भक्तों द्वारा संम्पन की जाती है। ट्रैकिंग के माध्यम से  230 किलोमीटर की दूरी के साथ 3-सप्ताह की कठिन यात्रा , नंदादेवी राज जात सबसे लंबे समय का तीर्थ हैं। तीर्थयात्रा कर्नाप्रयाग के निकट नौटी गांव से शुरू होती  है और हिमपात की चोटियों के बीच 5000 मीटर की ऊँचाई पर रूपकुंड के पास समाप्त होती है।
  9. लाटू देवता मंदिर उत्तराखंड के चमोली जिले के वान गांव के पास स्थित है। ये मंदिर लाटू देवता को समर्पित है, जो देवी नंदा देवी  के  गोद लिए भाई थे ये राज्य का सबसे अनोखा मंदिर है। क्योंकि मंदिर के अंदर किसी भी भक्त की अनुमति नहीं है। यहां तक कि पुजारी भी  दीप को रोशन करने के लिए आंखों पर पट्टी बांधकर मंदिर में प्रवेश किया। ये मंदिर साल में एक बार ही भक्तो के लिए खुलता है
    मान्यताओं के अनुसार , लोगों का मानना है कि इस मंदिर के अंदर साक्षात रूप में नागराज अपने अद्भुत मणि के साथ वास करते हैं, जिसे देखना आम लोगों के वश की बात नहीं है। पुजारी भी साक्षात विकराल नागराज को देखकर न डर जाएं इसलिए वे अपने आंख पर पट्टी बांधते हैं। लोगों का यह भी मानना है कि मणि की तेज रौशनी की चुंधियाहट इन्सान को अंधा बना देती है। लोग यह भी कहते हैं कि न तो पुजारी के मुंह की गंध तक देवता तक और न ही नागराज की विषैली गंध पुजारी के नाक तक पहुंचनी चाहिए। इसलिए वे नाक-मुंह पर पट्टी लगाते हैं।

 

 

 

 

Written by suneeta

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